चुनाव में फोन काॅल पर डिलिवरी हो रही कच्ची अवैध शराब

यूपी में अवैध कच्ची शराब का कारोबार दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है, इसके बावजूद कि जब तब इससे दर्जनों लोगों के मरने की घटनाएं होती रहती हैं। चुनाव में तो मदिरा उद्योग ने कुटीर उद्योग का रूप धारण कर लिया है। जिस तरह बड़ी बड़ी कंपनियों ने अपने उत्पाद को ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए ऑनलाइन व्यवसाय शुरू कर दिया है, उसी तर्ज पर अब कच्ची शराब की अवैध भट्ठियां चलाने वाले अपने चुनिंदा ग्राहकों को फोन पर उनके बताए स्थान पर अवैध शराब पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।

ज़हरीली शराब से मरे, न मुआवज़ा, न पकड़ा गया माफिया

यह कारोबार लोकसभा चुनाव में खूब फल फूल रहा है। सस्ती होने की वजह से चुनावी मौसम में कच्ची शराब की मांग खूब बढ़ गई है। इस अवैध कारोबार में कहीं न कहीं पुलिस व आबकारी विभाग की संलिप्तता भी दिखाई दे रही है। यही वजह है कि इस कारोबार से प्रतिवर्ष प्रदेश सरकार को अरबों रुपये का राजस्व हानि होने के साथ साथ जनहानि भी हो रही है।

विधवाएं ही रह गई हैं यहां, पति लोग पीकर मर गए !

स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग को इस तरह की शराब की बिक्री की पूरी नहीं तो आधी जानकारी होती है। लेकिन शराब कारोबारियों से इन लोगों के अवैध लेन देन के कारण ही यह धंधा यूपी के जंगलों के आसपास बनी बस्तियों, नदी, नाले व गन्ने को खेत के अलावा तमाम गांवों में कुटीर उद्योग की तरह पनप रहा है।

मुबारकपुर के 46 मृतकों के परिजनों को फूटी कौड़ी भी नहीं

इस अवैध कारोबार से जहां एक तरफ इसके कारोबारियों की दिन दूनी रात चैगुनी तरक्की हो रहा है वहीं इसके पीने वाले लोगों की अक्सर असमय मौत हो जा रही है। इस किस्म के शराब के पीने के शौकीन गरीब मजदूरों की संख्या ज्यादा होती है। कम रेट होने की वजह से यह लोग इसका सेवन करके अपने नशे की आदत की आग को बुझाते हैं।

जहरीली शराब के लिए टैंकरों से घातक रसायन की चोरी

बताया जाता है सिर्फ 40 रुपये में एक बोतल अवैध कच्ची शराब मिल जाती है जिसको दो या तीन लोग पीकर मस्त हो जाते हैं। शायद उनको यह पता भी रहता है यह शराब कितना रिस्की है फिर भी वह अपने नशे की आदत व गरीबी से मजबूर होकर इसका सेवन करते हैं। यही लोग कभी कभी शराब जहरीली हो जाने की वजह से अपनी जान भी गंवा देते हैं। अभी ज्यादा दिन नहीं हुए हैं जब कुशीनगर, सहारनपुर और आजमगढ़ में दर्जनों लोगों ने इसी तरह की शराब पीकर अपनी जान गंवा दी थी।

चीयर्स डेस्क

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