कैफी के शहर में गुम हो गयी लैला

कैफी के शहर में लैला गुम हो गयी है। उसको गुम हुए एक दशक से अधिक का समय हो गया है। उसके चाहने वाले एक दशक पहले वाली अपनी लैला को आज भी तलाश रहे हैं। इसके विपरीत एक दशक बाद डुप्लीकेट लैला अवतरित हुई है। इन स्थितियों के बीच उसको चाहने वाले खासा हताश हुए हैं। बात देशी शराब लैला के परिपेक्ष्य में हो रही है। गोरखपुर के सरैया डिस्टलरी की लैला नाम की शराब एक दशक पहले कैफी के शहर आजमगढ़ सहित समूचे पूर्वांचल में धूम मचाये हुए थी।
आजमगढ़ जिले में ही उस समय यह शराब अकेले प्रतिमाह करोड़ों रूपये का कारोबार कर रही थी। वजह यह रही कि यह शराब सफेद रंग की थी। इसके साथ ही यह सस्ती थी और इसका स्वाद भी काफी बेहतर था। शराब के शौकीनों का मानना था कि सफेद शराब में रंग नहीं मिलाया जाता, इसीलिए यह रंगीन शराबों से कम नुकसानदेह होती है।
कैफी के शहर में गुम हो गयी लैला
सब मिलाकर इस शराब की बिक्री ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में बिक्री का सारा रिकार्ड तोड़ दिया था। अचानक यह शराब लाइसेंसी दुकानों से गायब हो गयी। शराब के शौकीनों ने इस शराब को काफी तलाश किया मगर यह नहीं मिली। ऐसे में शराबी  दूसरे ब्रांड का चयन कर लिये। उन्होंने यह तर्क दिया कि लग रहा है कि यह शराब काफी बिक रही थी, इसलिए कम्पनी ने दुकान स्वामियों को कमीशन देना कम कर दिया होगा। तभी दुकान स्वामी इस शराब को नहीं मंगा रहे हैं। फिलहाल एक दशक बाद कुछ महीने से यह लैला शराब आजमगढ़ की शराब की दुकानों पर फिर दिखलायी पड़ने लगी है।
इस शराब के बाजार में आने से इसके चाहने वाले पुराने आशिकों के चेहरे एक बार खिले और उन्होंने इसे खरीदना भी शुरू कर दिया। यह अलग बात है कि जल्द ही लोगों का मोह इससे भंग हो गया। लोगों ने इसे खरीदना बन्द कर दिया। पूछे जाने पर इसके चाहने वालों ने बताया कि अब लैला में वह बात नहीं रही। अब न तो इसका स्वाद पहले की तरह से बेहतर है और क्वालिटी  भी काफी खराब है। इसको चाहने वाले एक दशक बाद लौटी अपनी लैला को डुप्लीकेट बता रहे हैं।
जो बिकेगा हम वही मंगायेंगेः राजा संतोष

आजमगढ़ जिले के प्रमुख शराब कारोबारी राजा संतोष साहू का कहना है कि जिस शराब की डिमांड होगी और जो ज्यादा बिकेगा, वह लोग वही शराब मंगायेंगे। उनका कहना है कि वह लम्बे समय से इस पेशे में हैं। मौजूदा समय में उनकी तीन दर्जन से अधिक देशी शराब की दुकान है। वह लैला का पुराना दौर भी देखे हैं और आज का भी समय देख रहे हैं। इस जिले में उन लोगों ने लैला की बिक्री नहीं रोका था।

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कम्पनी ने ही एक दशक तक इस जिले में सप्लाई नहीं दिया तो वह क्या बेचते। उनका कहना है कि उनके पास खुद शिकायतें आ रही है कि अब जो लैला आयी है, वह डुप्लीकेट है। इसका न तो स्वाद अच्छा है, न ही पहले जैसी तीव्रता है। अब ग्राहक इसे नकार रहा है तो निश्चित रूप से वह लोग इसे बेचना बन्द कर देंगे। ऐसे में इसे बन्द करने का तोहमत फिर हम कारोबारियों के सिर पर ही आयेगा।

चीयर्स  डेस्क 

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