न पीना गुनाह है, न पिलाना गुनाह है।
पीने के बाद होश में आना गुनाह है।।
आजमगढ़ पर यह लाइनें एकदम सटीक साबित होती हैं। आजमगढ़ के फुटपाथों पर खुलेआम मैकदा चलता है। सूबे में सरकार किसी को हो, आज तक कोई भी पीने वालों के इस साम्राज्य को खत्म नहीं कर पाया। जह यह कि सड़क किनारे खड़े होकर शराब की चुस्कियां लेने वालों में अगर कमजोर तबके के लोग होते हैं तो लम्बी लक्जरी गाड़ियां लेकर ऐसा करने वालों की भी कोई कमी नहीं होती है। यही कारण है कि अगर कभी किसी पुलिस अधिकारी ने इस साम्राज्य को खत्म कराने का प्रयास किया तो उसे ही जिला बदर होना पड़ गया। इन हालात स्थतियों के बीच अब कोई शराबियों के इस साम्राज्य की तरफ देखता भी नहीं है।

आजमगढ़ शहर के बीचोबीच स्थित रोडवेज इलाके की सभी सड़कों पर शाम ढलते ही रंगीन नजारा दिखलाई पड़ने लगता है। कदम-कदम पर अंडा व भूजा की दुकानें सज जाती हैं। इन दुकानों पर पानी, गिलास आदि की व्यवस्था भी मौजूद होती है। इसके अलावा कुछ स्थायी दुकानों पर ढाबानुमा छोटे होटलों पर भी शाम ढलते ही पीने-पिलाने का दौर शुरू हो जाता है। मद्धिम लाइटों के बीच हर तरह लड़खड़ाती आवाजों का कलरव सुनायी पड़ने लगता है। शहर के रेलवे स्टेशन रोड पर भी कुछ ऐसा ही दृश्य दिखलायी पड़ता है। इन दो स्थानों का उल्लेख तो सिर्फ इसलिए करना पड़ा कि यह दोनों काफी भीड़-भाड़ वाले इलाके होते हैं। जब इन इलाकों में पुलिस शराबियों का आतंक नहीं खत्म करा पाती तो अन्य स्थानों पर क्या खत्म करायेगी। सच तो यह है कि शहर में जहां भी शराबखाने हैं, वहीं पर यह स्थिति है। जिले के कस्बाई व देहाती इलाकों में भी इससे इतर स्थिति नहीं है।
ऐसा नहीं कि आजमगढ़ में पीने की जगह ही नहीं
ऐसा नहीं है कि आजमगढ़ में बैठकर पीने की अच्छी जगह नहीं है, इसलिए लोग सड़कों पर खुलेआम खड़े होकर पीते हैं।
आजमगढ़ शहर के बीचोबीच रैदोपुर में तृप्ति माडल शाप एवं रेस्टोरेन्ट काफी पुराना है। यहां सारी व्यवस्थाएं हैं और यह माडल शाप बहुत मंहगा भी नहीं है। इसी तरह से शहर के जुनेदगंज में संतुष्टि माॅडल शाॅप है। यह माॅडल शाॅप भी सामान्य रेट पर सुविधायें मुहैय्या कराता है। इसके अलावा रईश तबके के लोगों के लिए शहर के प्रतिष्ठित होटल गंगोत्री ने होटल के अंदर ही बार खोल रखा है। बावजूद इसके तमाम लोग सड़कों पर खड़ा होकर शराब पीना पसंद करते हैं।
सड़क पर पीने में दिखता है समाजवाद
सड़क पर पीने वाले कुछ शराब के सम्पन्न शौकीनों से बातचीत की गयी तो उन्होंने चैंकाने वाली बातें कही। उन्होंने कहा कि आजमगढ़ समाजवादियों का गढ़ है। फुटपाथ पर गरीब लोग पीते हैं। ऐसे में जब सम्पन्न लोग भी सड़क पर उनके साथ खड़े होकर शराब पीते हैं तो इसमें आजमगढ़ का समाजवादी चरित्र साफ परिलक्षित होता है। साथ ही सड़क पर खड़े होकर हंगामा करते हुए पीने में आनन्द भी आता है।