शराब वहीं ज्यादा बिकती है, जहां गरीबी अधिक है

तुम्हारे कागजों में गांव का मौसम गुलाबी है,
ये आंकड़ा झूठा है, ये दावा किताबी है….!

किसी शायर की ये लाइनें जहां मौजूदा व्यवस्था पर चोट कर रही हैं, वहीं पर ये लाइनें पूर्वांचल की व्यथा को भी बयां कर रही हैं। एक समय ऐसा भी था जब गहमरी संसद में फफक फफक कर रोए थे और कहा था कि पूर्वांचल में गरीबी का आलम ये है कि लोग जानवरों के गोबर से अनाज का दाना निकालकर भूख मिटा रहे हैं। कई दशक बीत गए इस वाकए को, मगर पूर्वांचल की स्थितियों में कोई खास सुधार नहीं हो सका। देश और प्रदेश की सरकारें भले ही यह दावा कर लें कि उन्होंने हर सिर पर छत का साया दे दिया है मगर यह दावा करने वाले लोग पूर्वांचल में आकर देखें तो पता चलेगा कि यहां के तमाम लोग आज भी झुग्गी झोपड़ियों में रहने को विवश हैं। आज भी यहां के लोगों को दो वक्त की रोटी मयस्सर नहीं होती है।

नशा शराब में होता तो नाचती बोतल…………………!

यह सही है कि पूर्वांचल में शराब पीने का चलन है मगर आंकड़े बताते हैं कि शराब वहीं अधिक बिकती है, जहां गरीबी अधिक होती है। यदि गरीबी अधिक न होती तो कच्ची शराब पीकर पूर्वांचल के सैकड़ों लोग हर साल मौत को गले नहीं लगाते। नोटबंदी के बाद गरीबी और भी बढ़ी है। दिल्ली, मुम्बई समेत बड़े शहरों में तमाम कंपनियां बन्द हुई हैं और लाखों लोग बेरोजगार हुए हैं तो पूर्वांचल में नोटबंदी केे बाद घर मकान बनने कम हुए हैं और गरीबों के पास कोई रोजगार नहीं बचा है।

बढ़ती जा रही है चुनाव और शराब की घनिष्ठता

आजमगढ़ जिलेे के कप्तानगंज थाना क्षेत्र के अलहनी गांव का रहने वाला नरायन एक सीधा साधा ग्रामीण था। मजदूरी करके परिवार की जीविका चलाता था। नोटबंदी के बाद से काम मिलना कम हो गया। ऐसे में परिवार के आगे दो वक्त के रोटी की तंगी आ गई। पत्नी व बहन के ताने अलग से मिल रहे थे। इन हालातों के बीच उसने कच्ची शराब पीना शुरू कर दिया। अब जब वह शराब पीने लगा तो परिवार में तनाव औैर भी बढ़ गया। पत्नी व बहन ताने देने लगी कि घर में खाने को कुछ नहीं और यह शराब पी रहे हैं। इसी बीच उसे बेटी पैदा हो गई। बेटी को वह बहुत दुलार स्नेह करता।

आंखों में आंख डालकर…प्रोस्त, तो अच्छी सेक्स लाइफ !

लेकिन उसे काम रोजना नहीं मिल पाता था, ऐसा नहीं कि उसने प्रयास नहीं किया कि उसको रोज काम मिले। इसी तनाव में बीते 16 मई की रात नरायन नशे में धुत होकर घर पहुंचा। अधिक शराब पीने की वजह से उसका अपनी पत्नी से विवाद शुरू हो गया।

उस दिन शायद उसका तनाव आपा पार कर चुका था। विवाद के बीच नरायन ने अपनी पत्नी की पिटाई शुरू कर दी। वह काफी देर तक जानवरों की तरह अपनी पत्नी को पीटता ही रहा। पत्नी की पिटाई के बाद वह 6 माह की अपनी दुधमुहीं बेटी को भी पीटना चाहा मगर उसकी बहन प्रेमशीला उसे बचाने के प्रयास में उसे लेकर भागने लगी। यह अलग बात है कि नरायन ने अपनी बहन प्रेमशीला को भागने नहीं दिया और घेर कर उसे रोक लिया। इसके साथ ही उसने अपनी बहन के हाथ से अपनी दुधमुहीं बेटी करिश्मा को छीन लिया। साथ ही बहन को भी लात घूसों से जमकर पीटा। ऐसी स्थिति में वह चीखती चिल्लाती रही। पत्नी व बहन को मारपीट कर घायल करने के बाद भी नरायन के सिर पर सवार खून कुछ कम नहीं हुआ। उसने बेरहमी के साथ अपनी दुधमुहीं बेटी का गला दबाकर उसका कत्ल कर दिया।

चुनाव का असर बीयर आपूर्ति खस्ताहाल

बेटी का कत्ल करने के बाद नरायन उसके शव को जमीन पर रख दिया और खुद भी शव के पास बैठकर फफक फफक कर रोया। वह चाहता तो घटना के बाद भाग सकता था, मगर कहीं नहीं भागा। उसकी पत्नी व बहन भी पिटाई का अपना सारा दर्द भूल गई थी। वह मासूम दुधमुंही बच्ची की मौत पर दहाड़े मार मारकर रो रही थी। इस बीच गांव के भी तमाम लोग आ गए। गांव के लोगों को कुछ देर तक तो समझ में ही नहीं आया कि वह क्या करें। काफी देर बाद गांव के लोगों ने इस हादसे के बाबत सूचना मुकामी पुलिस को दी। पुलिस के पूछताछ में वह फूट फूटकर रोते हुए अपना गुनाह कबूल कर लिया, पुलिस ने उसे जेल भेज दिया।

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