शराब कारोबारी का चंदा भी लौटा दिया था चरण सिंह ने

यूपी के विख्यात किसान नेता और पूर्व प्रधानमंत्री चैधरी चरण सिंह जिस दौर में सियासत किया करते थे, वह दौर नैतिकता के आदर्शों का दौर था। उन दिनों अधिकांश नेताओं के जीवन में नैतिकता का महत्वपूर्ण स्थान था। चैधरी चरण सिंह ने 1977 में यूपी में हुई एक जनसभा में मतदाताओं से कहा था कि उनकी पार्टी का प्रत्याशी अगर चारित्रिक रूप से पतित हो, शराब पीता हो या किसानों मजदूरों से धोखा करता हो तो वे उसे हराने में संकोच न करें।

 ये भी पढ़ें- ट्रेनों से होने लगा चुनाव के लिए शराब का अवागमन

इस जनसभा को हुए तीन चार साल गुजर चुके थे जब 1980 में फैजाबाद जिले की टांडा तहसील के चैधरी चरण सिंह समर्थक युवा नेता गोपीनाथ वर्मा विधानसभा चुनाव का टिकट मांगने गए। उन्हें देखते ही चैधरी चरण सिंह ने उन्हें टका सा जवाब दिया, ‘क्षेत्र में जाओ, यथासमय सूचित कर दिया जाएगा।’ चौधरी साहब का ये जवाब सुनकर वर्मा पहले तो परेशान हो गए, लेकिन फिर हिम्मत कर डरते डरते वर्मा ने चैधरी जी से कहा, ‘हमें कैसे सूचित कर दिया जाएगा, प्रदेश अध्यक्ष ने तो टिकट सूची से मेरा नाम काट कर मेरे नाम की जगह एक शराब कारोबारी का नाम लिख दिया है।’

ये भी पढ़ें- वोटिंग से पूर्व की रात, कथित रूप से शराब बंटने की रात !

ये सुनते ही चैधरी चरण सिंह ने जनता पार्टी (सेक्यूलर) प्रदेश अध्यक्ष रामवचन यादव को तलब किया और गोपीनाथ का नाम काटने की वजह पूछी। यादव ने बताया मजबूरी है। शराब कारोबारी ने नौ लाख रुपये का चंदा दिया हैं। इस पर चैधरी जी बिफर पड़े और बोले, ‘मजबूरी आपकी होगी, पार्टी की नहीं। आप व्यवसायी को उसके नौ लाख रुपए लौटा दें। हम किसी शराब व्यवसायी को प्रत्याशी नहीं बनाएंगे।’ इस तरह उस शराब कारोबारी का टिकट कट गया और गोपीनाथ का टिकट पक्का हो गया और गोपीनाथ 52 वोटों से चुनाव भी जीत गए।

ये भी पढ़ें- क्लोजिंग और चुनाव, दिल्ली से बड़ी मात्रा में मंगाई जा रही शराब

लेकिन धीरे धीरे ये नैतिकता और आदर्श सार्वजनिक जीवन से बिल्कुल गायब हुए लगते हैं। अब इस तरह के नैतिक साहस के किस्से सुनने को नहीं मिलते बल्कि चुनाव में शराब की खपत इसीलिए बढ़ भी जाती है कि बड़े पैमान पर प्रत्याशी मुफ्त शराब का वितरण स्वयं कराते हैं। इन चुनावों में कई क्षेत्रों से शराब वितरण की खबरें छप रही हैं।

चीयर्स डेस्क 

Related Articles

Back to top button