अभी ज्यादा दिन नहीं हुए हैं जब यूपी ही क्या पूरे उत्तर भारत में शराब व्यवसाइयों का अपना एक अलग ही रुतबा हुआ करता था और इस रोब दाब का नतीजा यह था कि इन चंद व्यवसाइयों के अलावा किसी की हिम्मत ही नहीं होती थी जो शराब के कारोबार में हाथ डालता। लेकिन पिछले दशक में कुछ तब्दीली आई और यूपी सरकार की आबकारी नीतियों में इस तरह के प्रावधान किए गए कि नए व्यवसाई भी इस ट्रेड में आ सकें। इस आबकारी नीति का ही नतीजा है कि फिलहाल यूपी की राजधानी लखनऊ में पिछले कुछ वर्षों में नए व्यवसाई शराब के कारोबार में शामिल हो गए हैं। लेकिन अभी भी पुराने शराब कारोबारियों को सिंडीकेट टूट नहीं पाया है। उनके रिश्ते नाते वालों के नाम से अभी भी यही लोग बाजार पर हावी हैं। लखनऊ शराब एसोसिएशन के महासचिव कन्हैया लाल मौर्या ने चीयर्स डाॅट काॅम से विशेष बातचीत में इस कारोबार की वास्तविकताओं के बारे में बताया। https://bit.ly/2Fb1qTV