चुनावी रंग में भंग कर सकती है अवैध शराब

चुनावी बिगुल बजते ही गांव, कस्बा, वार्ड के नुक्कड़ चैराहों पर जहां एक तरफ चुनावी चर्चा शुरू हो गई है, वहीं समर्थकों की संख्या में बढ़ोतरी करने के लिए पार्टी के छुटभैय्या नेता अपने चहेतों के खानपान पर खास ध्यान दे रहे हैं। चुनाव के मद्देनजर प्रदेश में अवैध कच्ची शराब का कारोबार भी लगातार बढ़ता जा रहा है। अगर आबकारी विभाग ने समय रहते इन अवैध शराब कारोबारियों पर शिकंजा नहीं कसा तो चुनावी रंग में भंग पड़ सकता है।
सूबे में अवैध शराब का कारोबार चुनाव के दौरान कुटीर उद्योग का रूप धारण कर लेता है। कच्ची शराब की अवैध भट्ठियां चलाने वाले गांव गांव में गैलन में भरकर शराब पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। इस अवैध कारोबार से प्रतिवर्ष प्रदेश सरकार को अरबों रुपये की राजस्व हानि होने के साथ साथ कभी कभी जनहानि भी हो जाती है।

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सूत्रों के अनुसार गोरखपुर महराजगंज जनपद के भारीवैसी वनटांगिया में तीन सौ से अधिक कच्ची शराब की भट्ठियां संचालित हो रही हैं। यह वनटांगिया क्षेत्र कच्ची शराब की डिस्टलरी के रूप में दोनों जनपद में प्रसिद्ध है। अभी हाल के दिनों में कुशीनगर व सहारनपुर शराब कांड के बाद पुलिस व आबकारी विभाग सक्रिय हुआ तो इस धंधे पर कुछ अंकुश लगा था। इधर चुनाव की घोषणा होते ही यह धंधा फिर से पनपने लगा है।

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झांसी जनपद के समथर थाना क्षेत्र में अवैध शराब कारोबारियों का आलम यह है कि सड़क के किनारे खुलेआम शराब बेच रहे हैं। यहां पियक्कड़ आए दिन शराब पीकर वाद-विवाद के अलावा आने-जाने वाली राहगीरों व महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी भी करने से नहीं चूकते हैं। प्रदेश के ज्यादातर जनपदों में जंगलों के आसपास की बस्तियों, गन्ने के खेतों के अलावा तमाम गांवों में अवैध कच्ची शराब की भट्ठियां कुटीर उद्योग की तरह लगातार पनप रही हैं।

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लोकसभा चुनाव के मद्देनजर शराब की मांग पहले की अपेक्षा ज्यादा बढ़ गई है। इस मांग को पूरा करने के लिए कच्ची शराब का कारोबार व उत्पादन पहले से ज्यादा बढ़ गया है। इस अवैध कारोबार से जहां एक तरफ इसके कारोबारियों को तरक्की दिन दूनी रात चैगुनी हो रही है वहीं कई लोग इसके पीने से काल कवलित हो जाते हैं इसके बावजूद सस्ती शराब के चक्कर में लोग मौत को गले लगा लेते हैं। इस किस्म की शराब का सेवन ज्यादा संख्या में गरीब मजदूर और ग्रामीण करते हैं। बताया जाता है सिर्फ 40 रुपये में एक बोतल अवैध कच्ची शराब मिल जाती है जिसको कम से कम दो या तीन लोग पीकर मस्त हो जाते हैं, शायद उनको यह पता भी रहता है कि यह शराब कितना रिस्की है फिर भी वह आदत से मजबूर होकर इसका सेवन करते हैं। यही लोग कभी कभी शराब जहरीली हो जाने की वजह से अपनी जान भी गंवा देते हैं। जहरीली शराब से मौतों की कई घटनाएं राज्य के विभिन्न हिस्सों में हाल के दिनों में हुई हैं जिनमें दर्जनों लोग मौत के मुंह में समा गये।

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इसके अवैध कारोबार में पुलिस व आबकारी विभाग की भूमिका संदेहास्पद रहती है। जिस क्षेत्र में अवैध कच्ची शराब की भट्ठियों की शिकायत प्रशासनिक स्तर पर ज्यादा हो जाती है वहां पुलिस व आबकारी विभाग के लिए लोग सक्रिय हो जाते हैं बाद में फिर पुराने ढर्रे पर आ जाते हैं। प्रदेश में अवैध कच्ची शराब का कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्राहकों की मांग को देखते हुए बड़े बड़े गैलन में भरकर गांव स्तर पर छोटे-छोटे कारोबारी खरीदकर ले जाते हैं। जहां से ये लोग लोकल स्तर पर सप्लाई करते हैं। इस कारोबार में पालीथीन का बहुत महत्व है। पालीथीन में पौवा, आधा व फुल रखा रहता है। जैसा ग्राहक होता है उसी तरह का पालीथीन उसे दे दिया जाता है। मजे की बात यह है कि इन अवैध कच्ची शराब भट्ठियों को चलाने वाले पुरुष जब जेल चले जाते हैं तो भी उनका धंधा बंद नहीं होता है। यह धंधा इन लोगों के घर की महिलाएं संभाल लेती हैं।

गोरखपुर से संदीप अस्थाना

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