शराब के दामों में बेतहाशा वृद्धि से यूपी के शराब उपभोक्ता ही परेशान नहीं हैं, यह फार्मूला पूरे देश की राज्य सरकारें लागू करती हैं। यूपी में फिलहाल 33000 करोड़ का सालाना राजस्व शराब उपभोक्ताओं को टैक्स के रूप में अपनी राज्य सरकार को देना पड़ रहा है। लेकिन सूत्रों के अनुसार यह आंकड़ा दरअसल कुल करीब 49000 करोड़ तक जाता है।
इतनी बड़ी धनराशि टैक्स के रूप में अदा करने के बाद भीं शराब उपभोक्ता अपने बुनियादी उपभोक्ता अधिकारों से अक्सर वंचित नजर आता है। जब तब जहरीली अवैध शराब पीकर लोग मरते रहते हैं। हाल ही में बाराबंकी के एक सरकारी ठेके से खरीद कर अवैध शराब पीकर करीब 25 लोग अपनी जान गंवा बैठे। फिर भी सरकार ने शराब की क्वालिटी को बेहतर बनाने के लिए समुचित कदम नहीं उठाए।
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शराब उपभोक्ताओं से सबसे अधिक टैक्स वसूलने में यूपी सरकार ही नहीं, पश्चिम बंगाल सरकार भी पीछे नहीं है। भीषण आर्थिक तंगी से जूझ रही ममता बनर्जी सरकार की सेहत को सुधारने में देशी शराब ने बड़ा रोल अदा किया है। पिछले करीब दो साल में बंगाल में देशी शराब की बिक्री बेतहाशा बढ़ने के साथ ही विवाद भी बढ़ा है। देशी शराब की बिक्री से सरकार को राजस्व के तौर पर करोड़ों रुपए मिल रहे हैं। लेकिन इसके साथ ही सरकार की इस नीति पर विवाद भी लगातार तेज हो रहा हैं। विपक्षी सीपीएम और कई गैर सरकारी संगठनों ने शराब के जरिए राजस्व बढ़ाने की सरकार की नीति के खिलाफ आवाज उठाई है।
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बंगाल के आबकारी विभाग ने पिछले साल 27 अरब रुपए की राजस्व वसूली का लक्ष्य रखा था जिसे इस साल बढ़ा दिया गया है। विभाग के एक अधिकारी बताते हैं कि यह आंकड़ा 30 अरब को पार कर जाएगा। पिछले साल इस मद में 21 अरब रुपए की आय हुई थी। इस साल वैसे तो अंग्रेजी शराब की बिक्री भी बढ़ी है। लेकिन देशी शराब की बिक्री के आंकड़े हैरत में डालते हैं। इस साल मार्च तक औसतन हर महीने इस शराब की 2.7 करोड़ बोतलें बिकती थीं। लेकिन नवंबर में यह आंकड़ा बढ़ कर 3.7 करोड़ तक पहुंच गया। इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए राज्य में पिछले कुछ महीनों के दौरान देशी शराब के चार बॉटलिंग प्लांट लगाए गए हैं। इसके अलावा सरकार के पास इसी तरह के ऐसे कम से कम 15 आवेदन विचाराधीन हैं।
बंगाल के आबकारी विभाग के सूत्रों के मुताबिक, पिछले साल महज देशी शराब की बिक्री से 5.44 अरब रुपए का राजस्व मिला था, जिसके साढ़े सात अरब होने की उम्मीद है.
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आबकारी विभाग के बढ़ते राजस्व से उत्साहित ममता सरकार बंगाल के बाॅर में भी शराब की बोतलें बेचने की अनुमति देने की तैयारी में है इससे करीब 60 करोड़ का राजस्व मिलेगा। सरकार ने कोलकाता के तमाम बड़े होटलों को 15 जनवरी तक सुबह चार बजे तक बाॅर खुले रखने की अनुमति दे दी है। पहले रात दो बजे तक ही बाॅर खुले रहते थे। एक बड़े होटल से शराब की बिक्री के मद में सरकार को औसतन हर सप्ताह 15 लाख रुपए का राजस्व मिलता है। अब बाॅर मालिकों को बाॅर के पास ही अंग्रेजी शराब की दुकान खोलने की अनुमति देने का फैसला किया गया है, यानी सुबह तक वहां शराब पीजिए और जाते समय बोतल भी बगल में दबा कर घर ले जाइए।