सरकारी ठेके से लेकर पी और मर गए 23 लोग बाराबंकी में

बाराबंकी में सरकारी ठेके की जहरीली शराब पीने से बुधवार को सात और लोगों ने दम तोड़ दिया। इससे मरने वालों की संख्या 23 हो गई। गंभीर रूप से बीमार 10 और लोगों को ट्रॉमा सेंटर में भर्ती करवाया गया है। दूसरी ओर बाराबंकी के निलंबित आबकारी निरीक्षक राम तीर्थ मौर्य व ठेकेदार दानवीर सिंह और उसके सहयोगी पप्पू जायसवाल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।। इसी साल फरवरी में भी सहारनपुर और आसपास के इलाकों में जहरीली शराब से  करीब 114 लोगों की मौत हुई थी।

आबकारी मंत्री जयप्रताप सिंह ने बताया कि जिला प्रशासन के चार अफसर और 8 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इनमें जिला आबकारी अधिकारी शिव नारायण दुबे, आबकारी इंस्पेक्टर राम तीरथ मौर्य, समेत 3 हैड कांस्टेबल और 5 कांस्टेबल शामिल हैं। डीजीपी ओपी सिंह ने कार्रवाई करते हुए इंस्पेक्टर रामनगर राजेश कुमार सिंह और सीओ पवन गौतम को निलंबित कर दिया है।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मरने वालों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को दो दो लाख रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की है। उन्होंने डीएम और एसपी को मौके पर पहुंचने और मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध करवाने के आदेश दिए। योगी ने कहा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।

एक ही परिवार के 4 की मौत

मरने वालों में छोटेलाल (60), उनके बेटे रमेश (35), दो पोते सोनू (25) और मुकेश (28) एक ही परिवार के हैं, जो रानीगंज के निवासी हैं। इनके अलावा सोनू, राजेश, पिपरी महार, राजेंद्र वर्मा, सेमराय और महेंद्र ततहेरा शामिल हैं।

गांव में चल रही नकली शराब की फैक्ट्री
मृतकों में से चार लोग एक ही परिवार के सदस्य थे। तीन भाई रमेश गौतम, मुकेश, सोनू के साथ उनके पिता छोटेलाल की मौत हो गई। रमेश की पत्नी रामावती ने बताया कि घर में शव को कंधा देने वाला भी कोई नहीं बचा।

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ग्रामीणों का आरोप है कि दानवीर सिंह की नकली शराब बनाने की एक अवैध फैक्ट्री है। यह नकली शराब उसकी सरकारी ठेके वाली दुकान पर बेची जाती है।

फरवरी में भी जहरीली शराब से  114 लोगों की मौत हुई थी
इसी साल फरवरी महीने में भी यूपी और उत्तराखंड के चार जिलों जहरीली शराब पीने से  114 लोगों की मौत हुई थी। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, सबसे ज्यादा 54 मौतें उप्र के सहारनपुर में हुईं। मेरठ में 18, कुशीनगर में 10 और उत्तराखंड के रुड़की में 32 लोगों की जान गई थी। सूत्रों की मानें तो माफिया ने शराब में स्प्रिट या चूहा मारने की दवा मिलाई थी।

असम में हुई थी 150 की मौत
फरवरी में ही असम में भी जहरीली शराब के कारण 150 लोगों की मौत हुई थी। गोलाघाट जिले में 85 और सटे हुए जोरहाट जिले में 58 की मौत हुई। यह जहरीली शराब से हुआ प्रदेश का सबसे बड़ा हादसा बताया था।

चीयर्स डेस्क

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