दवा के नाम पर, धर्म बताकर मिल रही गुजरात में शराब !

गुजरात शराब प्रतिबंधित राज्य है, यानी कि ड्राई स्टेट। वहां पर अन्य स्थानों की तरह शराब की दुकानें नहीं हैं। अब सवाल ये है कि गुजरात में शराब क्यों प्रतिबंधित है, गुजरात ड्राई राज्य क्यों है, स्वाभाविक रूप से लोग जानना चाहेंगे कि गुजरात में शराब के निषेध के पीछे कारण क्या है। लेकिन वहां भी शराब सरकारी नियम कानूनो के तहत मिलती है, जी हां सरकार स्वयं शराब आपूर्ति का बंदोबस्त करती है, घर्म के नाम पर और दवा के नाम पर। इसके लिए बाकायदा परमिट जारी किए जाते हैं।

गुजरात चूंकि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जन्मस्थली है और गांधी जी जीवन पर्यंत मद्य निषेध के समर्थक रहे तो उन्हें श्रद्धांजलि स्वरूप उनके गृह राज्य को 1960 में शराब मुक्त करने का निर्णय लिया गया था। याद रहे कि गांधीजी के जन्मदिन, दो अक्टूबर को राष्ट्रीय ड्राई डे के रूप में मनाया जाता है।
लेकिन गुजरात वास्तव में ड्राई स्टेट नहीं है क्योंकि यहां स्वयं सरकार ने शराब की आपूर्ति के लिए कुछ नियम कानून बना रखे हैं जिनके अनुसार धर्म बताकर दवा के नाम पर शराब उपलब्ध कराई जाती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार गुजरात में 61,353 ऐसे मरीज हैं, जिनकी बीमारी सिर्फ शराब पीने से ही दूर हो सकती है। इसलिए गुजरात सरकार के प्रोहिबिशन एंड एक्साइज विभाग ने उन्हें शराब पीने के लिए हेल्थ परमिट जारी किया है।
मरीजों को शराब पीने की इजाजत तो सरकार ने दी है लेकिन जो शराब के मरीज नहीं है उनके लिए भी शराब की कभी कमी नहीं रही। गुजरात से सटे राजस्थान और दमन दीव से अवैध रूप से शराब गुजरात में आती है और चोरी छुपे बिकती है। अहमदाबाद रेलवे स्टेशन के सामने रोजाना शाम को वैन टाइप की कारें आती हैं, लोग उनसे पैकेट में बंद शराब की बोतल खरीदते हैं। एक के बाद दूसरी वैन लगती है, ये सिलसिला नया नहीं है। इसी तरह के दूसरे अड्डे हर जगह बन चुके है।

अब जरा गुजरात सरकार के उस परमिट की बात हो जाए जिस पर शराब मिलती है। इस परमिट को हासिल करने के लिए पहले अपना धर्म बताना पडे़गा। आवेदन पत्र के चैथे कोष्टक में धर्म लिखना जरूरी है। इस प्रमाण पत्र के साथ आवेदन करना होता है साथ में आयकर दस्तावेज भी लगाना होते हैं, जिसमें आवेदनकर्ता की मासिक आय कम से कम 25,000 प्रतिमाह होना आवश्यक है। यही नहीं, इसके बाद सिविल अस्पताल के डॉक्टर प्रमाणित करते हैं कि इस व्यक्ति की बीमारी का एकमात्र इलाज शराब ही है। हालांकि हेल्थ परमिट की मांग करने वाले व्यक्ति को रोज कितनी मात्रा में शराब की जरूरत है, यह भी सिविल अस्पताल का डॉक्टर ही तय करता है। अहमदाबाद में प्रोहिबिशन विभाग के अधीक्षक एनसी सादरानी ने बताया कि अगर हेल्थ परमिट मांगने वाला आवेदक गुजरात या भारत सरकार में अपनी सेवाएं दे रहा है, तो उसे अपने विभाग के प्रमुख की तरफ से एनओसी यानी अनापत्ति प्रमाण पत्र भी लाना होगा। जिन लोगों के पास हेल्थ परमिट है, वे लोग राज्य सरकार की प्रमाणित लिकर शॉप से अपने परमिट से शराब खरीद सकते हैं। पूरे गुजरात में 61,353 और अहमदाबाद में 12,803 लोगों के पास ये हेल्थ परमिट है, जिससे वो शराब खरीद सकते हैं।

चीयर्स डेस्क

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