कुलदेवता पर शराब की जगह साफ्ट ड्रिंक !

महिलाओं ने शराब के खिलाफ मोर्चा खोल दिया लगता है। लखनऊ हो या कुशीनगर या हरदोई, इन जनपदों के कई स्थानों पर महिलाओं ने शराब की बिक्री ही नहीं बंद की बल्कि पीकर आने वालों के साथ भी ऐसा सलूक किया के वे पीना भूल गए। हरदोई के एक गांव में तो महिला आंदोलन का इतना जबर्दस्त असर हुआ कि कुलदेवता पर शराब के स्थान पर साफ्ट ड्रिंक चढ़ाया जाने लगा।

वहीं लखनऊ के रहीमाबाद के बंजारन खेड़ा गांव की महिलाओं का कहना है कि ना तो गांव के आसपास शराब बनने देंगे और ना ही शराब पीकर किसी को गांव में घुसने देंगे। इस घोषणा के बाद एक स्वयं सेवी संगठन की महिलाएं बंजारन खेड़ा पहुंची और इन महिलाओं की प्रशंसा की। इनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने का आश्वासन दिया। महिलाओं के इस अभियान में पुलिस भी उनका साथ दे रही है। शराब और शराबियों के खिलाफ अभियान में भी महिलाओं के कारण ही तेजी आई है। अवैध कच्ची शराब के खिलाफ पुलिस लगातार छापे डाल रही है क्योंकि जब भी पुलिस सुस्त पड़ती है, ये महिलाएं थाने पहुंच जाती हैं। पूर्व ग्राम प्रधान जिन्दौर ने भी इन महिलाओं का हौसला बढ़ाया। इन महिलाओं की मदद का भी भरोसा दिलाया है।

महिलाओं का छलका दर्द

हाल ही में कुशीनगर में शराब पीने से हुई दर्जन भर मौतों के बाद पीड़ित परिवारों  की महिलाओं ने शराब पीने पर सबक सिखाने का मन बना लिया है। हालांकि उन्हें अपनी पिटाई का भय भी सता रहा है। इसके बावजूद इन महिलाओं ने ये बीड़ा उठा लिया है। गांव जवही दयाल चैन पट्टी के बिंद टोली की महिलाओं में चिरैया ने बताया कि शराब पीकर पति घर आते हैं, कुछ कहने पर पति मारने लगते हैं। ममता ने कहा कि पति कहीं से भी पीकर घर में जब आते हैं तो विवाद करते हैं। लेकिन अब हम लोग समूह बनाकर शराब पीने वालों का विरोध करेंगे। खाना भी नहीं देंगे। गंगिया ने कहा कि अब तो बर्दाश्त से बाहर हो गया है। नशाखोरी छुड़ानी ही होगी। लमुनिया का भी कुछ ऐसा ही दर्द है, कहा कि दिन भर मछली मारने और उसे बाजारों मे बेचने के बाद जो पैसा मिलता है, उसकी ये लोग शराब पी जाते हैं।

कुल देवता पर शराब की जगह साफ्ट ड्रिंक

कुछ स्थानों पर तो शराब जीवन में इस कदर समाई थी कि धार्मिक मान्यताओं तक को इसने जकड़ रखा था। कुल देवता तक पहुंच बनाने वाली इस मदिरा ने बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया था। पानी सिर से ऊपर गया तो एक दिन इसी गांव की महिलाओं ने इसके खिलाफ कमर कस ली और पुरूषों को ही नहीं सुधारा, बल्कि धार्मिक कुप्रथाओं की मान्यताओं तक को बदल दिया। अब वही गांव शराब से मुक्त होकर खुशहाल हो गया है और कुलदेवता को कोल्ड ड़िंक की बोतल चढ़ाई जाती है।

ये नजारा है हरदोई के टड़ियावा विकास खंड के पुरवा देवरिया का जहां करीब 800 की आबादी वाला मजरा नटपुरवा। यहां अधिकांश नट बिरादरी के लोग रहते हैं, इनका पुश्तैनी पेशा बैंड बाजा बजाना है। दादा चतुर्भुज कुलदेवता हैं। गांव में उनकी समाधि भी है हर साल मई में कुलदेवता की समाधि पर मेले में भी प्रसाद के रूप में शराब ही चढाई जाती थी। पुरूष नशे में मस्त रहते और महिलाएं इसका शिकार होतीं। तीन वर्ष पहले गांव की बेटी राजस्थान के सामाजिक आंदोलनों से जुड़ी अरवल राजकीय बालिका विद्यालय की शिक्षिका सरिता भारत कुप्रथा के विरोध में आगे आई।

कई महिलाएं उनके साथ आगे बढ़ीं, सीमा, विद्यावती, भूरी, मनीषा, लल्ली, आशा आदि ने साथ दिया और मई 2016 में चूल्हा चौका  छोड़ शराब के विरोध में मैदान में उतरीं। पुरूषों ने विरोध किया तो कुछ युवा आगे आए, बुजुर्गों ने समर्थन दिया और मुहिम रंग लाई। आज गांव में कोई शराब नही पीता है।
आंदोलन का नेतृत्व करने वाली सरिता भारत बताती हैं कि कुलदेवता की पूजा में ही शराब न पीने का संकल्प लेकर शराब पीने वाले के सामाजिक बहिष्कार का एलान कर दिया था। कुलदेवता को शराब के बजाए कोल्ड ड्रिंक चढ़ाना शुरु का दिया गया । महिलाओं का कहना है कि अब उनके परिवार खुश हैं। जो कमाते हैं, परिवार पर ही खर्च होता है। गाय पाल रखी हैं और उनका दूध पीते हैं।

चीयर्स डेस्क

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