ब्रांडेड शराब में भी होता है मिलावट का खेल !

ऐसा नहीं है कि जल़रीली शराब का मतलब केवल गांवों मिलने वाली कच्ची शराब ही होती है। अंग्रेजी ब्रांडेड शराब में भी जमकर मिलावट की जाती है, और इससे भी लोग मरते हैं या बीमार होते हैं। डुप्लीकेट अंग्रेजी शराब भी बाजार में बड़ी मात्रा में मौजूद है और ग्रामीण इलाकों या शहरों की सीमा के आस पास की दुकानों पर यही शराब ब्रांडेड शराब के नाम पर खूब बिक रही है। सच तो यह है कि मिलावट का खेल बड़े पैमाने पर चल रहा है। दुर्भाग्य से कच्ची शराब तो आसानी से पुलिस और आबकारी विभाग की पकड़ में आ जाती है लेकिन अंग्रेजी ब्रांडेड शराब की दो बोतलों से तीन बोतल शराब बनाने का खेल आसानी से पकड़ में नहीं आता।  पुलिस सूत्रों के अनुसार शराब माफिया दो स्तर पर कार्य कर रहे हैं। एक अंग्रेजी शराब तो दूसरी देशी में मिलावट का खेल। इसमें एक बार इस्तेमाल हो चुकी बोतलें उनके काफी काम आती हैं। कबाड़ी के यहां से ऐसी बोतलें हासिल कर उनमें मिलावटी शराब भर दी जाती है। इस मिलावट में वही इथनाॅल मिलाया जाता है या आक्सीटोसिन जो देसी शराब में मिलाया जाता है। मिलावट करने वाले ज्यादा पढ़े लिखे नहीं होते। उन्हें पता नहीं होता है कि इस मिलावट के जरा से असंतुलन से सैकड़ों की जिंदगी लील सकती है। राजस्थान और हरियाणा से लाई गई शराब की बोतलों को दो से तीन और चार करने में कई बार इस प्रकार की मिलावट कर उसकी तीव्रता बढ़ाई जाती है। यह शराब चूंकि यूपी और दिल्ली के दामों से सस्ती मिलती है तो लोग इसे जल्दी खरीद लेते हैं, नशा भी यूपी की शराब से अधिक होता है तो कम दामों में मज़ा और मस्ती दो गुनी हो जाती है। लेकिन इस शराब के लगातार सेवन से लीवर डैमेज हो जाता है और आंखें तो निश्चित रूप से कजोर हो जाती हैं।

सुहेल वहीद

शूटर इस धंधे में बड़ी भूमिका निभाते हैं। शराब माफिया के लिए यह सामान्य शब्द है। अंग्रेजी शराब की बोतल में फिट और चिपके हुए ढक्कन प्लास्टिक के होते हैं जिनको हल्का गर्म कर ढीला करने के बाद खींचा जाता है। ढक्कनों को खींचने वाले को शूटर कहते हैं। बोतल से उपकरण के जरिए ढक्कन खींचे जाते हैं। इसके बाद महंगी अंग्रेजी शराब की बोतल जिसमें ‘छर्रा’ पड़ा होता है। यानी एक निश्चित मात्रा में शराब निकलती है। उससे शराब निकालने के लिए मवेशियों वाले इंजेक्शन का इस्तेमाल करते हैं। पहले से रखी हुई मिलावटी शराब से एक चैथाई बोतल भरी जाती है। सिर्फ चैथाई इसलिए ताकि मूल शराब का स्वाद और गंध बनी रहे। एक खास तरह का रसायन जो कच्ची शराब में इस्तेमाल होता है। इसको धंधेबाज ‘ओपी’ कहते हैं। यह शब्द हरियाणा से लेकर यूपी और बिहार तक में प्रचलित है। सूत्र बताते हैं कि इसकी मात्रा जरा सी अधिक होने पर इथाइल एल्कोहल रसायनिक क्रिया से मिथाइल में बदल जाता है और पीने वाले की मौत हो जाती है। इस मिथाइल को रोकने के लिए ही तरह तरह के उपकरणों से ब्रांडेड शराब को गुजारा जाता है।

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