पीकर मर गए लोगों की विधवाओं से आबाद पुसैना गांव

कोई सोच भी नहीं सकता कि यूपी में एक गांव ऐसा भी है जो जहरीली शराब पीकर मर गए लोगों की विधवाओं से आबाद है, लेकिन ऐसा गांव भी है जिला मैनपुरी में, नाम है पुसैन। ईशान नदी के तट पर स्थित पुसैना की आबादी लगभग 4,008 है, इस गांव में लगभग 300 परिवार रहते हैं और यहां लगभग 150 परिवारों में 25 से 65 वर्ष की आयु की सैकड़ों विधवाएं हैं, जिनके पतियों की मृत्यु पिछले 15 वर्षों में नकली शराब के सेवन से हुई है। कुछ परिवार तो ऐसे हैं जिनमें एक से अधिक पुरुष सदस्य की मौत हो चुकी है।

मैनपुरी जिले के पुसैना गाँव में प्रवेश करते ही माहौल में बदबू महसूस होने लगती है और बिना सिंदूर के बड़ी संख्या में महिलाएं। ये वो महिलाएं हैं जिन्होंने अपने पति को जहरीली शराब के कारण खो दिया और पुसैना विधवाओं के गांव के रूप में बदनाम हो गया। हाल ही में यूपी और उत्तराखंड में हुए शराब कांड में 114 से ज्यादा लोगों की जान चली गई और ये खबर हर तरफ सुर्खियों में आ गई लेकिन पुसैन गांव में लगातार मौतें हो रही हैं और इस गांव की खबर लेने वाला कोई नहीं है क्यूंकि अवैध शराब का बनना और खपत यहां बहुत आम है।

PUSAINA-MAINPURI

पुसैन गांव की विधवाओं को अपने परिवार के खर्च कैसे चलाती हैं, कोई नहीं जानता, क्योंकि कमाने वाले पुरुष हैं ही नहीं। लेकिन अवैध व्यापार में लिप्त तस्करों के आतंक के कारण महिलाएं बोल ही नहीं पाती हैं। ये महिलाएं इतनी डरी हुई हैं कि वो पूछने पर इंकार कर देती हैं। यहां की 45 वर्षीया नेकसी बताती हैं कि जहरीली शराब के कारण कुछ साल पहले वह अपने पति और चार बच्चों को खो चुकी हैं। सुनीला देवी की चार बेटियां हैं उनके अनुसार उनके पति राजेंद्र कुमार एक खेतिहर मजदूर थे, पांच साल पहले मर गए। उसके अनुसार “शराब ने हमारे परिवार को तबाह कर दिया अब, बड़ी मुश्किल से गुजारा हो पाता हैं, बेटियां बहुत छोटी हैं, उनसे बाहर काम कराना भी मुश्किल है।”

पुसैन गाँव के प्रधान, राजेश कुमार ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में यहां पहले की अपेक्षा अवैध शराब के खपत में कमी आई है, लेकिन यहां नदी के किनारे अवैघ शराब बनना अभी बंद नहीं हुआ है। जब तक शराब बनती रहेगी यहां के लोग पीते रहेंगे। एक दलित ने कहा, मैंने कई लोगों की मौत के बाद हमारे गांव में इस व्यापार को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन माफिया की धमकी के आगे सब बेकार हो गया। प्रधान के मुताबिक कई विधवाओं को भी इस शराब व्यवसाय का हिस्सा बनने के लिए मजबूर किया जा रहा है, क्योंकि उनके पास आय का कोई अन्य स्रोत नहीं है। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ के बच्चे भी व्यापार में सक्रिय हैं। इस गांव के लोग दबी जुबान से बताते हैं कि यहां हर दिन लगभग दस बारह हजार लीटर शराब का निर्माण और बिक्री की जाती है। पुलिस बजाहिर बहुत कुछ करने का दावा करती है, लेकिन दरअसल कुछ नहीं कर रही है। ग्रामीण बताते हैं कि पांच सात सौ लीटर का शराब केवल पुसैना गांव में ही बनाई जाती है। पूरा काम पुलिस और आबकारी विभाग की नाक के नीचे किया जाता है। करीब 60-70 लीटर शराब प्रतिदिन यहां के ग्रामीण ही पी जाते हैं, शेष आसपास के गांवों और आसपास के जिलों में भेजी जाती है। उन्होंने बताया कि पुसैना गांव में बनी शराब आास पास के इलाकों में काफी प्रसिद्ध है, मार्केट में उसकी खपत दूसरे ब्रांड से अधिक है। लेकिन कभी कभी इसी शराब में जब इथनाल और मेथेनाल का अनुपात गड़बड़ा जाता है तो यही शराब जहरीली हो जाती है और मौत का कारण बन जाती है। पुसैना इसका जीता जाता उदाहरण बन चुका है कि जहरीली शराब पीने के बाद की दुनिया क्या होती है।

मैनपुरी से नीरज महेरे

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