पूरी सैलरी शराब में उड़ा देते थे जार्ज वाशिंगटन

जॉर्ज वॉशिंगटन, अमेरिका के पहले राष्ट्रपति, इनकी फोटो उसी तरह डॉलर पर छपती है जैसे अपने रुपए पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की। जॉर्ज को अमेरिका में सर्वोच्च आर्मी जनरल (जनरल ऑफ द आर्मीज ऑफ अमेरिका) का दर्जा भी मिला। यानी जार्ज वाशिंगटन को जो ओहदा या दर्जा प्रदान कर दिया गया वह किसी और को अब नहीं मिलेगा।

जार्ज वॉशिंगटन ने ही अमेरिका को गृह युद्ध से निकाल कर उसे एक आदर्श देश के रूप में स्थापित किया। सम्मान स्वरूप ही अमेरिका की राजधानी का नाम भी वाशिंगटन रखा गया। वह अमेरिका के पहले राष्ट्रपति बने, उन्हें अपार श्रद्धा, प्यार और सम्मान अमेरिका में मिला। मगर जॉर्ज का पूरा जीव विवादों और अजीबो गरीब संयोगों से भरा रहा। वह जबर्दस्त किस्म के शराबी थे। खूब पीते थे, इतनी पीते थे कि उनके बारे में कहा जाता है कि जितनी सैलरी मिलती थी सबकी पी जाते थे।

पूरी सैलरी शराब में उड़ाई

1789 में जार्ज वॉशिंगटन तनख्वाह के तौर पर अमेरिका के बजट का 2 प्रतिशत लेते थे। अगर आज की तारीख में जार्ज वॉशिंगटन राष्ट्रपति होते तो साल में करीब 12,000 करोड़ रुपए की सैलरी उठा रहे होते। मजे की बात ये है कि वह अपनी इस सैलरी का बड़ा हिस्सा शराब और जुएं में उड़ा देते थे।

जब जार्ज वॉशिंगटन ने शपथ ली थी तो उनका एक दांत बाकी बचा था क्योंकि वह खूब तंबाकू खाते थे। इसके अलावा वो डिप्थीरिया, टीबी, चेचक, कब्ज, निमोनिया, कार्बंकल, टॉन्सिल, मलेरिया, एपिग्लॉटिटिस जैसी और कई बीमारियों से भी ग्रस्त रहते थे। इसीलिए वॉशिंगटन को अमेरिका का सबसे बीमार राष्ट्रपति माना जाता है।

बताया जाता है कि जार्ज वॉशिंगटन दवाओं की ओवर डोज के चलते नपुंसक हो गए थे। उनकी कोई संतान भी नहीं हुई। वॉशिंगटन अपनी एक नौकरानी के लड़के को अपना बताते थे। मगर उसके बच्चा होने से दो साल पहले तक वॉशिंगटन युद्ध के मैदान में थे और कभी घर नहीं आए थे। जॉर्ज को अपने दोस्त की बीवी से प्रेम हो गया था। उन्होंने ‘वोटरी ऑफ लव’ नाम से पत्र लिखा जो आज भी मौजूद है।

अपनी दारू की फैक्ट्री

जार्ज वॉशिंगटन की अपनी व्हिस्की की फैक्ट्री थी। उनके यहां साल में 45,000 लीटर शराब बनती थी। इसका ये मतलब कतई नहीं कि जितनी बनती थी वह पी जाते थे। इस फैक्ट्री से शराब बिकती भी थी। उनकी मौत को लेकर भी अजीब संयोग है । वॉशिंगटन बीमार थे एल्बिन रॉलिंस नाम के सज्जन उनका खून लेने के लिए आए। वॉशिंगटन ने अपनी बांह सामने करके कहा कि ‘डरो मत जितना चाहो ले लो।’ एल्बिन ने चार राउंड में शरीर से पांच बोतल (80 आउंस) खून निकाल लिया। इसके बाद वह बेहोश हो गए। उनके सेक्रेटरी कर्नल टॉबियस लियर को बुलाया गया। वॉशिंगटन बीच में होश में आए और अपने अंतिम संस्कार के निर्देश दिए। इसके कुछ ही देर बाद उनकी मृत्यु हो गई।

चीयर्स डेस्क


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