आंखों में आंख डालकर…प्रोस्त, तो अच्छी सेक्स लाइफ !

जैसे अपने यहां पीने से पहले जाम टकरा कर लोग ’चीयर्स’ बोलते हैं वैसे ही जर्मनी में जाम टकरा कर पीने से पहले शब्द ’प्रोस्त’ बोला जाता है। लेकिन इस प्रोस्त बोलने के भी नियम बड़े सख्त हैं और मान्यता बेहद जबर्दस्त। यहां कम से कम इतना तो ठीक है कि चीयर्स बोला या नहीं बोला, कोई बात नहीं। लेकिन प्रोस्त के पीछे की अवधारणा बेहद डराने वाली भी है।

कम फैंसी नहीं हैं कई देशी ब्रांड

प्रोस्त वैसे तो पूरे जर्मनी में बोला जाता है लेकिन बवेरिया राज्य की राजधानी म्यूनिख में विशेष रूप से बियर फेस्ट के समय ये शब्द खूब सुनने को मिलता है। प्रोस्त बोलने का तरीका ये है कि जाम तैयार होने के बाद कपल अपने अपने हाथों में जाम उठाकर एक दूसरे की आंखों में आंखें डालकर प्रोस्त बोलें। अगर गलती से भी आंखों में आखें नहीं डाल पाए और दो में से किसी ने भी उस लम्हा आंखें इधर उधर कर दीं या कुछ हो गया तो समझिए सब चोपट। क्योंकि उस शख्स की अगले सात सालों की सेक्स लाइफ बर्बाद। ऐसी मान्यता है प्रोस्त बोलने के पीछे।

क्यों आपस में टकराए जाते हैं पीने से पहले गिलास

प्रोस्त बोलने का चलन या रिवाज पूरे जर्मनी में एक तरह से है लेकिन कपल्स के बीच ये शब्द सबसे ज्यादा प्रचलित है कारण वही है कि अगर पीते समय प्रोस्त को अच्छे से बोल लिया और आंखों में आंखें डालते वक्त किसी की पलक तक नहीं झपकी तो समझिए अगले सात वर्षों तक मजेदार रहेगी सेक्स लाइफ। इस कारण जाम तैयार करने के बाद इसे बोलने के लिए काफी सावधानी बरती जाती है, काफी तैयारी की जाती है। खासकर लड़कियां कुछ ज्यादा ही सतर्क रहती हैं प्रोस्त बोलते समय।

आंखों में आंख डालकर...प्रोस्त, तो अच्छी सेक्स लाइफ
एक मैं और एक तू मूवी का दृश्य

प्रोस्त का शाब्दिक अर्थ, वही है जो चीयर्स का है। यानी खुशी मनाओ लेकिन उसके पीछे मान्यता सेक्स वाली है। चीयर्स का शाब्दिक अर्थ अचानक मिली खुशी से है, अक्सर मामलों में जैसे मैच जीतने के बाद शैम्पेन की बोतल खोली और चीयर्स कह कर सब उसे पीते हैं। चीयर्स का वास्तविक अर्थ वाह वाह या शानदार भी हो सकता है। यानी किसी भी प्रकार से व्यक्त की गई खुशी चीयर्स में शामिल हो जाती है।

नशा शराब में होता तो नाचती बोतल…………………!

लेकिन प्रोस्त के साथ ऐसा नहीं है, इसके बावजूद कि इसमें भी खुशी और उल्लास शामिल है। जर्मन चूंकि हर मामले में बेहद अनुशासित होते हैं तो इस मामले में भी उन्होंने एक डिसिप्लिन शामिल कर ली है। बाॅन यूनिवर्सिटी में इंडोलाॅपी के प्रोफेसर ऑनसी जोएल के अनुसार प्रोस्त बोलते समय आंखों में आंखे डालकर एक दूसरे को निहारने से शराब के नशे का असर भी जरा सेक्सी हो जाता है और जाहिर है कि मस्ती का दूसरा नाम ही सेक्स है या खुशी को हासिल करने की बेहतरीन अभिव्यक्ति सेक्स ही है तो इसके पीछे की अवधारणा की सच्चाई से इनकार नहीं किया जा सकता।

चीयर्स डेस्क

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