उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के ओलिया गांव में सन् 1932 के सितंबर माह में पैदा हुए शेखर जोशी हिन्दी साहित्य में एक महत्वपूर्ण स्तम्भ का दर्जा रखते हैं. दाज्यू, कोशी का घटवार, बदबू, मेंटल जैसी कहानियों ने शेखर जोशी को लोकप्रियता की नई उंचाइयां दीं. उन्होंने नई कहानी की पहचान को भी अपने तरीके से प्रभावित किया है. लघु एवं छोटी साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित होना उनकी प्राथमिकता रही. पहाड़ी इलाकों की गरीबी, कठिन जीवन संघर्ष, उत्पीड़न, यातना, प्रतिरोध उम्मीद और नाउम्मीदी से भरे औद्योगिक मजदूरों के हालात, शहरी-कस्बाई और निम्नवर्ग के सामाजिक-नैतिक संकट, धर्म और जाति में जुड़ी रुढ़ियां….उनकी कहानियों के विषय रहे हैं. शेखर जोशी की कहानियों का अंगरेजी, चेक , पोलिश, रुसी और जापानी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है.