बढ़ती गर्मी से बियर, व्हिस्की बनाने वाली कंपनियां परेशान

पर्यावरण के बदलाव का नुकसान हर किसी को हो रहा है। यूरोप की बढ़ती गर्मी से लिकर इंडस्ट्री भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। दक्षिण पश्चिम फ्रांस में 600 साल पुरानी कॉन्यैक (एक तरह की ब्रांडी) इंडस्ट्री संकट से जूझ रही है। बढ़ते हुए तापमान के कारण उनके प्रसिद्ध अंगूरों की मिठास बहुत बढ़ गई है जिसके कारण ब्रैंडी बनाने में दिक्कत आती है। इन लोगों का मानना है कि अगर तापमान इसी तरह बढ़ता रहा और अंगूर का मीठापन इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में बड़ी भारी समस्या खड़ी हो जाएगी। इस समस्या से निपटने के उपाय तलाशने के लिए हजारों यूरो रिसर्च के नाम पर खर्च किए जा चुके हैं लेकिन फिलहाल कोई समाधान निकलने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है।

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बढ़ती गर्मी से उत्तर में, स्कॉटलैंड की प्रसिद्ध व्हिस्की के साथ भी ऐसी ही मुश्किल पैदा हो गई है। व्हिस्की बनाने वाले परेशान हैं, ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण सूखे की स्थिति पैदा होने से उन्हें ताजा पानी नहीं मिल पा रहा है।

पिछली गर्मियों में भी कुछ ज्यादा ही तापमान पैदा हो गया था जिसके कारण कई व्हिस्की बनाने वाली फैक्ट्रियों को बंद करना पड़ा था। मौसम वैज्ञानिकों ने चेताया है कि मौसम लगातार सख्त होता जा रहा है। पर्यावरण से छेड़छाड़ बहुत भारी पड़ सकती है। इसलिए इसके विकल्पों पर सोचा जाना इस समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

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ब्रिटेन की नेशनल वेदर सर्विस के मुताबिक आजकल के हालात का अगर औद्योगिक युग से पहले से तुलना करें तो अब ब्रिटिश आइल्स में गर्मियों में मौसम में प्रचण्ड गर्मी और सूखा पड़ने की आशंका तीस गुना बढ़ गई है। ब्रिटेन और आयरलैंड में अब हर आठ सालों में प्रचण्ड गर्मियां पड़ने का आशंका है और बाकी देशों में भी हालात इससे जुदा नहीं होंगे।

उधर चेक रिपब्लिक और अमेरिकी बियर उत्पादक पानी की कमी और सूखे के कारण फसलों की कम पैदावार से प्रभावित हो रहे हैं। इन कंपनियों ने भी बियर बनाने को लेकर आ रही समस्या पर चिंता व्यक्त की है।

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पूरी दुनिया में हो रही इन मौसमी तब्दीलियों से सभी को मुश्किल हो सकती है, जो पीते हैं उन्हें भी और जो नहीं पीते हैं उन्हें भी। क्योंकि यह जो बदलाव आ रहे हैं उससे हजारों लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। यह भी चिंता का विषय है कि फसलों की पैदावार खराब रहने के कारण कीमतों में जो बढ़ोतरी होगी, उससे क्या होगा। पानी की कमी हो गई तो मानवीय संकट उठ खड़ा होगा और उससे राजनीतिक अस्थिरता भी पैदा हो जाएगी। इससे साफ है कि मामला सिर्फ व्हिस्की, ब्रांडी और बियर के पैग से जुड़ा नहीं रह गया है।

चीयर्स डेस्क

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