26 गांव के लोग पी रहे दूषित पानी

यूपी के बस्ती जिले में जेई, एईएस प्रभावित 26 ग्राम पंचायतों की भारत सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा पानी की जांच कराई गई। यहाँ लिए गए कुल 1036 नमूनों में से 226 फेल हो गए। इनमें बैक्टीरिया पाए गए जो कि जेई, एईएस का कारण बन सकते हैं। इन गांवों में हैंड पंप का पानी पीने योग्य नहीं है, फिर भी लोग मजबूरन बैक्टीरिया युक्त पानी पी रहे हैं।

प्रदेश के जेईएईएस प्रभावित 20 जिलों में पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय ने कुछ ग्राम पंचायतों को चिह्नित कर वहां पानी की जांच के निर्देश दिए थे। बस्ती जिले में भी जेईएईएस प्रभावित ग्राम पंचायतों में पानी की जांच के लिए नमूने लिये गए। कुल 26 ग्राम पंचायतों में पानी की जांच हुई। इनमें 226 नमूने ऐसे मिले जिनका पानी पीने योग्य नहीं है। इस पानी में ऐसे बैक्टीरिया मिलें जो जेईएईएस के कारक हैं।

इन गांवों के पानी में बैक्टीरिया

सल्टौआ गोपालपुर विकास खंड के लक्ष्मनपुर, उमरा खास, बनरही जंगल, हर्रैया के केशवापुर, दुबौलिया के केवांड़ी मुस्तहकम, ऊंजी मुस्तहकम, बनकटी का देवमी, रौतापार, चंदुआ महरी, रामपुर रेवटी, गौर के तेनुआ, बेलसड़, बस्ती सदर के कुसम्हा, खदरा, बनगवां, बहादुरपुर के बेनीपुर, कोटवा भरतपुर, रामनगर के बेलगड़ी, कप्तानगंज के पोखरा, लाहिलवारा, खजुरिया मिश्र, गौर के महुआडाबर, कुदरहा के दैजी, रामनगर के असनहरा, साऊंघाट का मुजेहना में पानी की जांच में बैक्टीरिया मिला।

इस माह 205 नमूनों की जांच, 50 पीने योग्य नहीं

एई जल निगम वीनस चौधरी ने बताया कि अगस्त माह में पानी जांच के लिए कुल 205 नमूने लिए गए। इनमें 197 जल निगम ने खुद लिए तो 8 नमूने लोगों ने लाकर दिए। सभी की जांच अधिशासी अभियंता जल निगम के कार्यालय में स्थित लैब में की गई। इनमें 50 मामलों में पानी पीने लायक नहीं रहा। इसमें गंदलापन(टर्बडिटी) पाई गई। बताया कि बस्ती में बैक्टीरिया युक्त पानी के भी जांच की व्यवस्था है।

जल में उपस्थित ऐसे पदार्थ जिनकी ओर से प्रकाश या तो अवशोषित कर लिया जाता है या बिखेर दिया जाता है। गंदलापन कहलाता है। पानी में गंदलापन उसमें उपस्थित उणका कण, सिल्ट, माइक्रो ऑक्सीजन तथा पेड़ पौधों की पत्तियों के कारण होता है। हैंडपंप के पास गंदगी के कारण ऐसा होता है।अधिशासी अभियंता जल निगम विश्वेसर प्रसाद ने कहा कि पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशानुसार कुल 1036 नमूने लिए गए थे जिनमें 226 का पानी बैक्टीरियायुक्त मिला। पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय को रिपोर्ट भेजकर इन गांवों में पाइपलाइन पेयजल परियोजना स्थापित करने का अनुरोध किया गया था। इनमें टेंडर की प्रक्रिया चल रही है।

चीयर्स डेस्क 

loading...
Close
Close