स्वर्ण मंदिर में लगा आधुनिक रेन वाटर रीसाइक्लिंग प्लांट

संसार को मानवता की सेवा का संदेश देने वाले श्री हरिमंदिर साहिब में अब जल संचयन कर बचाया जाएगा सात लाख लीटर पानी । श्री हरिमंदिर साहिब के परिक्रमा पथ की धुलाई में इस्तेमाल होने वाले लाखों लीटर पानी को व्यर्थ होने से बचाया जा रहा है। इसके लिए रेन वाटर रीसाइकिलिंग और हार्वेस्टिंग प्लांट स्थापित किया गया है।

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (एसजीपीसी) ने पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के सहयोग से यह प्लांट श्री हरिमंदिर साहिब कांप्लेक्स में स्थापित किया है। प्लांट ने काम करना शुरू कर दिया है। परिक्रमा पथ के पानी के साथ-साथ कांप्लेक्स में जमा होने वाले बारिश के पानी को भी इसके तहत दोबारा भूमि में भेजा जाएगा। इससे सीवरेज में अधिक पानी आने के कारण सीवरेज ब्लॉक की समस्या भी खत्म हो जाएगी। प्रोजेक्ट से जुड़ी वरुण मित्र कंपनी के अधिकारी अरुण नरियाल ने बताया कि श्री हरिमंदिर साहिब के परिक्रमा पथ की धुलाई में हर रोज करीब सात लीटर पानी बर्बाद हो जाता था।

अब इसी पानी को दोबारा उपयोग में लाया जा सकेगा। इस प्रोजेक्ट में दुनिया की आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है। इसमें डेप्थ फिल्ट्रेशन मॉड्यूलर टैंक सिस्टम स्थापित है। आधुनिक मशीनरी युक्ततीन तरह के टैंक बनाए गए हैं। पहले टैंक में परिक्रमा की धुलाई व बारिश का पानी आता है। उसमें लगे हुए विशेष दो तरह के विशाल आधुनिक फिल्टर पानी से मिट्टी व अन्य तरह की ठोस गंदगी को पानी से अलग करके साफ पानी को दूसरे टैंक में भेजते हैं। दूसरा टैक फिल्ट्रेन टैंक है। इसमें चार तरह के फिल्टर हैं, जो पानी में से हानिकारक तत्व, कार्बन व अन्य खतरनाक तत्वों को अलग करते हैं। इसके बाद पानी डिफिल्ट्रेशन रीचार्ज चैंबर में चला जाता है। वहीं से डबल फिल्ट्रेशन के बाद दोबारा धरती के अंदर चला जाएगा।

इसके चार चैंबर हैं, जो सौ-सौ फीट गहरे हैं। इन चैंबरों में प्रति घंटे तीन लाख लीटर पानी साफ होकर दोबारा भूमि में समा जाएगा। प्रोजेक्ट पर पांच लाख से अधिक का खर्च आया है। पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के निर्देशक काहन सिंह पन्नू ने बताया कि विभाग ने पर्यावरण और जल संरक्षण के मद्देनजर यह प्रोजेक्ट श्री हरिमंदिर साहिब में स्थापित किया है। अन्य लोगो इससे प्र्रेरणा ले सकेंगे। एसजीपीसी के मुख्य सचिव डॉ. रूप सिंह ने बताया, जल ही जीवन का संदेश सारी दुनिया तक फैलाने के लिए श्री हरिमंदिर साहिब में इस प्रोजेक्ट को स्थापित किया गया है। जल की एक बूंद भी अब इस परिसर में व्यर्थ नहीं जाने दी जाएगी।

चीयर्स डेस्क

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