शराब बैन से नहीं पड़ेगा शराब कंपनियों के कारोबार पे असर

यूनाइटेड स्पिरिट यूएसएल, यूनाइटेड ब्रेवरीज और रैडिको खेतान जैसी लिस्टेड कंपनियों पर आंध्र प्रदेश में शराब पर लगे बैन का सीमित असर होगा। दरअसल, इन बड़ी शराब कंपनियों को टोटल सेल्स का सिर्फ 4-6% हिस्सा यहां से हासिल होता है, जबकि इनके प्रॉफिट में कॉन्ट्रिब्यूशन तो और भी कम है। देशभर में बियर की टोटल सेल्स में 8% और इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) में 10% हिस्सा आंध्र प्रदेश का है। डमेस्टिक ब्रोकरेज फर्म एमके ग्लोबल ने यूबीएल के लिए वित्त वर्ष 2020-21 के ईपीएस एस्टिमेट को बरकरार रखते हुए बाय दी है जबकि यूएसएल को होल्ड रेटिंग दी है।

यूबीएल और यूएसएल को आंध्र प्रदेश से क्रमश: 6% और 4% सेल्स हासिल होती है, लेकिन इस सेल्स में पॉपुलर शराब का हिस्सा ज्यादा होने और भाव कम मिलने के चलते प्रॉफिट में उसका कंट्रिब्यूशन कम है। यूएसएल का पॉपुलर बिजनेस राज्य में फ्रेंचाइजी बेसिस पर चल रहा है इसलिए कंपनी की सेल्स और प्रॉफिट पर कम असर होगा। हमारा मानना है कि कंपनी के वॉल्यूम में तीसरे क्वॉर्टर में 2-3% की कमी आ सकती है, लेकिन चौथे क्वॉर्टर में कारोबार में स्थिरता आने पर रिकवरी हो सकती है।’

अभी जो हालात हैं, उसमें कंज्यूमर्स सोच समझकर खर्च कर रहे हैं, तो ऐसे में आंध्र प्रदेश में सभी बार के लाइसेंस कैंसिल करने और शराब बंदी को चरणबद्ध तरीके से लागू कराने का रास्ता तैयार करने के लिए नई लाइसेंसिंग पॉलिसी लाने के सरकारी कदम से लिकर कंपनियों को बड़ा नुकसान होगा। हालांकि शराब बंदी की कवायद चरणबद्ध तरीके से चलाए जाने और कुछ होटलों को छूट दिए जाने से कंपनियों को उसका असर कुछ हद तक कम करने में मदद मिलेगी।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के हेड-रिटेल रिसर्च दीपक जासानी कहते हैं, ‘शराब पर चरणबद्ध तरीके से रोक लगाने की चर्चाएं पिछले कुछ महीनों से पब्लिक में चल रही थी, इसलिए उसका असर शेयरों के दाम पर ज्यादा नहीं होगा।’ सोमवार को यूबीएल का शेयर 1222.60 रुपये और रेडिको खेतान का शेयर 307 रुपये पर फ्लैट रहा, जबकि यूएसएल का शेयर 2% चढ़कर 620.20 रुपये पर बंद हुआ। 2015 में जब बिहार में शराब बंद की गई थी, तब लिकर कंपनियों के शेयरों के दाम में तेज गिरावट आई थी क्योंकि देश की टॉप चार लिकर कंपनियों को वहां से 2,000 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिलता था।

चीयर्स डेस्क 

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