शराब पीने वालों के लिए खुशखबरी

झारखंड सरकार शराब पीने वालों के प्रति मेहरबान होती नज़र आ रही है।  उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने बड़े मॉल और डिपार्टमेंटल स्टोर में भी लाइसेंस देकर शराब बेचने की इजाजत दी है।  उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के सचिव ने प्रेस वार्ता कर बताया कि वर्ष 2018-19 में राजस्व संग्रहण में लगभग 28% की वृद्धि हुई है।  साल 2019-20 के लिए विभाग को 1800 करोड़ राजस्व संग्रहण का लक्ष्य दिया गया है, जिसमें जुलाई 2019 तक 801 करोड़ की राजस्व प्राप्ति हो चुकी है।  विभागीय सचिव ने कहा कि ई-लाटरी के माध्यम से दुकानों की बंदोबस्ती शुरू की गई है।

उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग इस बात को स्वीकार तो करता है कि रेगुलर शराब का सेवन सेहत के लिए हानिकारक है।  हालांकि, विभाग रिस्पांसिबल लिक्वर को इनकरेज करने की बात भी कहता है।  सूचना भवन में पत्रकारों को जानकारी देते हुए विभाग के सचिव राहुल शर्मा ने कहा कि बड़े मॉल और डिपार्टमेंटल स्टोर में भी लाइसेंस लेकर महंगी शराब बेची जा सकती है।

सचिव राहुल शर्मा ने कहा कि शराब को लेकर सरकारी नियंत्रण से अपेक्षित परिणाम नहीं निकला जिसके बाद नीति में परिवर्तन किया गया है।  मौके पर मौजूद विभाग के भोर सिंह यादव ने कहा कि शराब दुकानों से शराब खरीदने के बाद सड़क पर या दुकानों के आसपास शराब सेवन को लेकर सख्ती बरती जा रही है।  इस तरह से जो लोग पकड़े जाते हैं उन्हें कम से कम 10 हज़ार रुपये का फाइन किया जाता है।  उन्होंने कहा कि जहरीली शराब के नियंत्रण को लेकर हर मुमकिन कोशिश की जा रही है।  हड़िया आदि उत्पाद पर रोक का कोई विचार नहीं है।

उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के सचिव  ने बताया खुदरा उत्पाद दुकानों, होटल, रेस्तरां, बार और क्लब में मदिरा के परिवहन के लिए ऑनलाइन परमिट निर्गत किया जा रहा है।  इतना ही नहीं ट्रेक एंड ट्रेस टेक्नोलॉजी के माध्यम से शराब के पारदर्शी व्यापार को बढ़ावा दिया जा रहा है।

चीयर्स डेस्क 

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