शराब कारोबार में दिखा मंदी का असर! घटी बिक्री की रफ्तार

देश की अर्थव्यवस्था में छाई मंदी का असर सिर्फ एफएमसीजी सेक्टर पर ही नहीं पड़ रहा है। इसका प्रभाव शराब कारोबार पर भी देखने को मिल रहा है। जनवरी से सितंबर के बीच शराब मार्केट की ग्रोथ 2-3 फीसदी रही है। शराब कंपनियों के मुताबिक, मंदी के साथ ही कुछ राज्यों में बाढ़ और टैक्स में बढ़ोतरी का असर बिक्री पर पड़ा है। इन्हीं कारणों के चलते कंपनियां अधिक बिक्री नहीं कर पा रही हैं। देश की सबसे बड़ी शराब कंपनी यूनाइटेड स्पिरिट्स  तो शराब के व्यापार में पैसा फंसने के डर से बिक्री करने से बच रही है।

वोदका और जिन की बिक्री में गिरावट

जुलाई से सितंबर की तिमाही में देश में बनी विदेशी शराब (IMFL) की बिक्री में महज 1.4 फीसदी की बढ़त हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में इसकी बिक्री में 12.9 फीसदी की बढ़त हुई है। व्हिस्की और ब्रैंडी की बिक्री में तो बढ़त हुई है, लेकिन इस दौरान वोदका और जिन की बिक्री में गिरावट आई है।  इस दौरान जिन की बिक्री में 4.6 फीसदी तक की गिरावट आई है।

आईएमएफएल भारत में बनी विदेशी शराब होती है और इसकी कुल बिक्री में हिस्सेदारी करीब 70 फीसदी है।  इसमें रॉयल स्टैग, मैकडॉवल, ब्लेंडर्स प्राइड और ऑफिसर्स च्वॉइस जैसे ब्रैंड आते हैं। अप्रैल से जून की तिमाही के दौरान इस सेगमेंट की बिक्री में महज 2 फीसदी की बढ़त हुई थी।  इस दौरान चुनावों की वजह से कई तरह की रोक लगी थी।

इसके पहले मार्च तिमाही में आईएमएफएल की बिक्री में 2.8 फीसदी की बढ़त हुई थी। साल 2012 से 2017 के पांच साल के दौरान आईएमएफएल की बिक्री में 4 फीसदी की बढ़त हुई है।  भारत दुनिया में शराब के सबसे बड़े बाजारों में से है। इस साल जनवरी से मार्च के दौरान भारत में आईएमएफएल के 9.1 करोड़ केस की खपत हुई थी।

हो सकता है भारी नुकसान

प्रतष्ठित मैगज़ीन  की खबर के मुताबिक, यूनाइटेड स्पिरिट्स ने पिछले सप्ताह इनवेस्टर्स को बताया कि उसे डर है कि नकदी के संकट के चलते ट्रेडर्स शराब का स्टॉक जमा कर लेंगे, लेकिन समय पर पेमेंट नहीं कर पाएंगे। इस डर से कंपनी प्रोडक्ट्स की अधिक बिक्री नहीं कर रही है। यूनाइटेड स्पिरिट्स कंपनी जॉनी वॉकर और मैकडॉवेल जैसे ब्रैंड्स की मालिक है। बिक्री रुकने से कंपनी को भारी नुकसान हाेने की आशंका है।

चीयर्स डेस्क 

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