शराबी की भी होती है जाति ?

भारतीय समाज में जाति प्रथा का चलन है। सभी जगह तो नहीं लेकिन कुछ जगहों पर तो बहुत ही ज्यादा है। भारतीय संविधान में जाति कोई स्थान नहीं रखती।  लेकिन छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग द्वारा अवैध रूप से शराब का कारोबार करने वालों के खिलाफ अगर कोई क़ानूनी कार्यवाही की जाती है तो उनके घर के बाहर उनका नाम जाति अदि लिखी दी जाती है।

छतीसगढ़ के आबकारी विभाग में अंग्रेजों का बनाया हुआ कानून अब भी चलता है। इस कानून के तहत शराबी की उसकी जाति से
पहचान होती है। यह कानून तब बना था, जब ओडिशा, बिहार ओर झारखंड एक ही राज्य का हिस्सा थे। उस वक्‍त आबकारी विभाग में धारा 47 (ए) के तहत जो अभियोग सृजित हुआ था , उसमें शराबी के पकड़े जाने या फिर उसके फरार होने पर उसका नाम, पता और पेशा के साथ उसकी जाति भी लिखना अनिवार्य कर दिया गया था।

तीनों राज्य आज अलग हो गए हैं, लेकिन आज भी झारखंड में इस कानून का पालन होता है। उत्पाद विभाग द्वारा अवैध शराब के कारोबार या फिर उसके इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ 47 (ए) के तहत दर्ज किए जाने वाले अभियोग के दौरान एक प्रपत्र बनाया जाता है। उसमें फरार आरोपी के लिए अदालत से उसकी गिरफ्तारी का वारंट मांगा जाता है। उस वारंट में आबकारी विभाग के नियमों में उसकी जाति लिखना अनिवार्य होता है। यदि उसकी जाति नहीं लिखी जाती है तो प्रपत्र को अधूरा माना जाता है।

दूसरी ओर, विभिन्‍न आपराधिक मामलों में दर्ज होने वाली एफआईआर में किसी भी तरह की जाति का या फिर धर्म का विवरण नहीं होता है। सामान्य रूप से यदि किसी आरोपी का एफआईआर में जिक्र होता है तो उसका नाम, पिता का नाम और साथ ही पता अंकित होता है।

चीयर्स डेस्क 

loading...
Close
Close