लखनऊ का सबसे वीआईपी क्षेत्र झेल रहा है पीने के पानी की समस्या

एलडीए ने नहीं कराई स्थाई बोरिंग, दूषित पानी का दुष्प्रभाव झेल रहे इलाके के लोग

यूपी की राजधानी लखनऊ के सबसे वीआईपी क्षेत्र कहे जाने वाले गोमती नगर विस्तार में रहने वाले लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। यहाँ लोग वर्षों से जलापूर्ति की समस्या से जूझ रहे हैं। घरों में लोग टोटियों में कपड़ा बांधने को मजबूर हैं। वाटर प्यूरीफायर लगाये बिना यहां बोरिंग का पानी नहीं पिया जा सकता है। आप को बता दें कि गोमती नगर विस्तार को बसाने का काम लखनऊ विकास प्रधिकरण ने किया है। एलडीए के पास लखनऊ के विकास की जिम्मेदारी है।

इलाके में पीने के पानी के लिए कोई मूलभूत व्यवस्था नहीं होना सबसे बड़ा कारण है। एलडीए ने कोई स्थाई बोरिंग नहीं कराई है जिसके कारण दूषित और मटमैला पानी इलाके में आता है। यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि निर्माण एजेंसियों ने बिल्डिंग निर्माण के समय लगभग 180 से 200 फुट की बोरिंग की थी। उसी बोरिंग से पानी की सप्लाई वर्तमान में अपार्टमेंट में की जा रही है। इस पानी का उपयोग न तो पीने के लिए न ही अन्य कार्यों के लिए किया जा सकता है। जिसका परिणाम है कि सभी अपार्टमेंट में हर छह महीने में तीन से चार ट्रक बालू पानी की टंकियों से निकाल रहा है। इस तरह टैंकों की सफाई में अपार्टमेंट का लगभग 40 से 50 हजार रुपए सालाना खर्च होता है।

सिर्फ एक अपार्टमेंट में कराई बोरिंग

गोमती नगर विस्तार महासमिति ने पिछले दिनों कल्पतरू अपार्टमेंट की बोरिंग फेल हो जाने पर जब सवाल उठाए थे तो एलडीए ने लगभग 400 फीट से ऊपर की बोरिंग विस्तार के एकमात्र कल्पतरू अपार्टमेंट में करा दी। बाकी के अपार्टमेंटों में लोग अभी भी दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।

ये अपार्टमेंट झेल रहे गंदे पानी की समस्या

गोमती नगर विस्तार में लगभग दो दर्जन से ज्यादा अपार्टमेंट हैं जिसमे रहने वाले हजारों लोगों को गंदे पानी की सप्लाई की जा रही है।  मुख रूप से गंगा, जमुना, सरस्वती, शारदा, राप्ती, अलकनंदा, बेतवा, रोहणी, कावेरी, शिप्रा, सतलज, ग्रीनवुड, वनस्थली, सुलभ, हिमालयन, पार्क व्यू, सरजू, अपना आवास और सहज आवास में दूषित जलापूर्ति की समस्या है।

एक दर्जन टंकियों में से दो सही बाकी खराब

गोमती नगर विस्तार में लगभग एक दर्जन पानी की टंकियां बनी हैं जिसमें दो को छोड़कर कोई काम नहीं कर रही हैं। कोई अधूरी है तो कोई लीकेज होने के कारण बंद पड़ी हुई है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार 

निर्माण के समय आवश्यकतानुसार बोरिंग कराई गई है। जहां तक पानी के टैंकों से मिट्टी निकलवाने की बात है तो मरम्मत का काम तो कराना ही पड़ता है। ऐसी समस्या मेरी नजर में नहीं है। अवधेश तिवारी, अधिशासी अभियंता लखनऊ विकास प्राधिकरण

लखनऊ के अन्य इलाके भी हैं पेरशान 

गोमती नगर विस्तार ही नहीं लखनऊ के और भी कई इलाके हैं जहां पीने के साफ़ पानी की समस्या बनी रहती है। लखनऊ के कटरा मकबूलगंज, महाराष्ट्र भवन वाली गली लालकुंआ, आलमबाग का प्रेमनगर, नटखेड़ा, सरदारी खेड़ा, गीतापल्ली, उदयगंज का नई बस्ती, जय नारायण लेन, बाजारखाला का पुराना हैदरगंज इलाके में गंदा पानी पीना मजबूरी। यहां पानी की सप्लाई नलों के द्वारा की जाती हैं।

चीयर्स डेस्क 

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