राजस्थान में शराब ठेकेदारों की मौज

राजस्थान के जालोर में आबकारी विभाग की ओर से संचालित शराब की दुकानें कहने को ही कायदों का पालन कर रही हैं। इन दुकानों में कायदों का जमकर हनन किया जा रहा है। जिम्मेदारों की चुप्पी के कारण सरकारी कायदों के साथ संचालित होने वाली दुकानों में नियम-कायदे ताक पर रखे जा रहे हैं। दुकानों से न केवल भारी मात्रा में शराब निकाली जा रही है बल्कि अवैध रूप से बेची भी जा रही है, लेकिन महकमा इसकी रोकथाम करना तो दूर निगरानी तक नहीं कर पा रहा।

जिम्मेदारों की मौन स्वीकृति में शराब ठेकेदारों की मौज हो रही है। जिलेभर में कमोबेश यहीं स्थिति है। हाल ही में रानीवाड़ा क्षेत्र में इस तरह के कुछ मामले प्रकाश में आए हैं। गत दो दिनों में ही जालोर व सांचौर क्षेत्र में भी इस तरह के मामले पकड़ में आ चुके हैं, लेकिन आबकारी की विंग मूकदर्शक बनी हुई है। जिला आबकारी अधिकारी विनोद वैष्णव का कहना है कि सूचना मिलने पर आबकारी की विंग भी कार्रवाई करती हैं।

गत माहभर में इस तरह के मामले पुलिस ने पकड़े हैं। इन सभी मामलों में जब्त की गई शराब की खेप लाइसेंसी दुकानों से लाई गई थी। बताया जा रहा है कि दुकानों से लाई गई शराब को मनपसंद इलाकों में अवैध रूप से बेचा जाता है। माना जा रहा है कि आबकारी महकमे की शिथिलता में ठेकेदार अवैध रूप से शराब निकाल रहे हैं।

लाइसेंसी दुकानों से एक मुश्त शराब निकाली जा रही है। इसे हल्के वाहनों में भरकर आगे से आगे पहुंचाया जा रहा है। ठेकेदारों को एक मुश्त माल बिकने से मुनाफा मिलता है तो माल को परिवहन करने वाले तस्करों को भी मोटा फायदा मिलता है। महकमे की शिथिलता में ठेकेदारों व तस्करों का यह गठजोड़ आसानी से चल रहा है।

गत माहभर में ही रानीवाड़ा व जसवंतपुरा व करडा पुलिस थाना क्षेत्र में इस तरह के मामले पकड़े जा चुके हैं। गत दो दिनों में भाद्राजून व झाब थाना क्षेत्र में भी पुलिस ने दो वाहन जब्त कर राजस्थान में बिक्री के लिए निर्मित शराब की खेप बरामद की है। जाहिर है कि अवैध रूप से शराब बेचने का यह कारोबार जिलेभर में चलाया जा रहा है।

चीयर्स डेस्क 

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