यूपी में बोतल बंद पानी के नाम पर खिलवाड़

इस बात पर शायद ही कोई ध्यान देता हो कि यूपी के अधिकांश छोटे शहरों में बिना भूगर्भ विभाग की अनुमति के छोटे आरओ प्लांट धड़ल्ले से चल रहे हैं। बड़े शहरों में भी यही काम हो रहा है लेकिन वहां कुछ कम्पनियों ने इन कार्यों की अनुमति ले रखी है। कुटीर उद्योग का रूप ले चुके पानी के इस गोरखधंधे पर एनजीटी ने भी आपत्ति दर्ज कराई है और मानक को पूरा न करने वाले ऐसे धंधों को बंद करने पर जोर दिया है। वहीं दूसरी तरफ यूपी में कंपनियां मानकों को तक पर रख, बोतल बंद पानी के नाम पर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रही हैं।

यूपी में जिन 217 कंपनियों ने बोतल बंद पानी बेचने के लिए लाइसेंस लिया है, वह बोतल पर एक्सपायरी डेट तक डालने की जहमत नहीं उठा रहे। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने पहली बार बोतल बंद पानी के नमूने लिए तो वह भी भौचक रह गया। पानी के 217 नमूने में से 66 फीसद में एक्सपायरी डेट, बैच नंबर और पैकिंग की तारीख तक नहीं मिली।

यूपी में बोतल बंद पानी बेच रही कंपनियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वह पानी की बोतल पर सभी जरूरी जानकारी जरूर दें। बोतल बंद पानी के जो 217 नमूने लिए गए उसमें से 143 में यह सर्वाधिक जरूरी जानकारी नहीं मिल रही। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विक्रम सिंह कहते हैं कि बोतल में खराब गुणवत्ता की प्लास्टिक का प्रयोग होने के कारण कैंसर भी हो सकता है।

क्या फर्क है बोतल बंद पानी व मिनरल वॉटर में

बोतल बंद पानी यानी पैक्ड ड्रिंकिंग वॉटर और मिनरल वॉटर में अंतर होता है। पैक्ड ड्रिंकिंग वॉटर नल का पानी फिल्टर से साफ करने के साथ-साथ रिवर्स ऑस्मोसिस जो कि एक केमिकल प्रॉसेस होता है उससे साफ कर पैक किया जाता है। इसमें मिनरल यानि खनिज तत्व मिलाना बॉटलिंग कंपनियों पर निर्भर करता है।

चीयर्स डेस्क 

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