युवा अवस्था में एल्कोहल लेना, होने वाले बच्चो के लिए खतरनाक

युवा अवस्था में हमारे द्वारा ली जाने वाली अलकोहल की मात्रा हमारे भाविष्य में होने वाले बच्चो के स्वास्थ पर व उनकी शारीरिक बनावट पर बुरा असर डालती है।

आजकल  अल्कोहल लेना स्टेट्स सिंबल बन चुका है। कम उम्र में अल्कोहल लेना शुरू करने पर यह एडिक्शन बन रहा है। एडल्ट ऐज में उनके स्वास्थ्य पर गलत असर पड़ता है। अल्कोहल की वजह से मां बनने की संभावना घटती है, क्योंकि इससे एग की क्वालिटी खराब होती है। इन महिला के गर्भवती होने पर अबॉर्शन की रिस्क बढ़ती हैं।

वहीं, यदि गर्भवती महिलाएं सप्ताह में तीन से चार बार अल्कोहल लेती है तो उनमें फीटल अल्कोहल सिंड्रोम हो सकता है। इस सिंड्रोम की वजह से बच्चे की चेहरे की बनावट अलग हो जाती है। ये बच्चे चपटी और छोटी नाक, छोटा मुंह,तिरछी आंखें और छोटा सिर के साथ जन्म लेते है।

इनका चेहरा देखकर मालूम किया जा सकता है कि ये इस सिंड्रोम से ग्रसित है। इनमें कन्जेनाइटल एनॉलोमी होने के कारण कान, नाक में परेशानी, फटे होंठ, हड्डियों में प्रॉब्लम, सिर में पानी भरना, रीढ़ की हड्डी में गांठ हो सकती है।

अल्कोहल लेने वाली महिला के बच्चे की डेथ पेट में होने की रिस्क बढ़ जाती है। या फिर उसकी ग्रोथ कम होती है। इसके अलावा इन बच्चों में न्यूरो डवलपमेंट नहीं होने के कारण ये स्कूल में भी बेहतरीन रिजल्ट नहीं दे पाते हैं। इनका मानसिक विकास नहीं होने से आईक्यू लेवल कम रह जाता है। साथ ही इनका व्यवहार सामान्य बच्चों की तुलना में अच्छा नहीं रहता है।

-डॉ. नीलम जैन, गाइनीकोलॉजिस्ट, जयपुर

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