केंद्र सरकार के लिए सिरदर्द बना वाटर ट्रिब्यूनल विधेयक

आजकल लगता है भाजपा के लिए समय ठीक नहीं चल रहा है। शिवसेना के बाद अब एनडीए के एक पुराने घटक शिरोमणि अकाली दल के तेवर भी तल्ख हैं। अकाली दल की नाराजगी उस विधेयक को लेकर है जिसे राज्यों के बीच पानी के विवादों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करने के लिए लाया जा रहा है। लेकिन अकाली दल का मानना है कि इससे पंजाब को अपना पानी हरियाणा और राजस्थान को देना पड़ सकता है। इससे पंजाब में पीने के पानी के साथ-साथ वहां के किसानों के सामने भी जल संकट पैदा हो जाएगा।

अकाली दल के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल ने कहा कि पिछले सत्र में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस मामले में हस्तक्षेप किया था और अमित शाह से विधेयक को पारित नहीं करने का अनुरोध किया था। तब लोकसभा में विधेयक पारित हो गया था लेकिन सरकार इसे राज्यसभा में नहीं लाई।

हमारी मांग थी कि इस विधेयक को ही वापस लिया जाए लेकिन सरकार ने इस सत्र में फिर से विधेयक को कार्यसूची में डाला है जो हमें स्वीकार नहीं है। उन्होंने कहा कि पंजाब आज पानी की भारी कमी से जूझ रहा है इसलिए पानी बंटवारे का फैसला पुराने आयोग के फैसले के आधार पर आज नहीं किया जा सकता है। सरकार को नए सिरे से इस मामले को देखना होगा तथा पंजाब की आज की पानी की जरूरतों को समझना होगा। अकाली ने कहा कि यह पंजाब के लिए बड़ा मुद्दा है तथा उन्हें उम्मीद है कि दूसरे दल भी राज्यसभा में विधेयक का विरोध करेंगे।

दल के रुख से साफ है कि राज्यसभा में वह विरोध करेगा। अकाली के महज तीन सीटें राज्यसभा में हैं। लेकिन शिवसेना के हटने से तीन सीटें सरकार की पहले ही कम हो गई हैं। राज्यसभा में भाजपा के पास बहुमत नहीं है बल्कि कार्यशील बहुमत है जो बदली परिस्थितियों में प्रभावित हो सकता है।

चीयर्स डेस्क 

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