बिहार में बढ़ रहा दूषित पानी का एरिया

बिहार भर में दूषित पानी का क्षेत्रफल हर वर्ष बढ़ रहा है। पीएचइडी के मुताबिक 2006 के बाद 2019 तक सबसे अधिक आयरन का क्षेत्रफल बढ़ा है। ऐसे में लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। राज्य सरकार ने नल जल योजना के माध्यम से दूषित क्षेत्रों में शुद्ध पानी पहुंचाने का निश्चय मार्च 2020 तक किया है। इसके बावजूद राज्य में दूषित पानी का क्षेत्र बढ़ रहा है।

पीएचइडी के मुताबिक राज्य के किसी भी जिले का पानी बिना जांच के पीने से बीमारी होने की आशंका बढ़ गयी है। वर्षों पहले यह कहा जाता था कि जमीन के भीतर कहीं से भी पानी निकाल कर पिया जा सकता है, लेकिन जानकारों के अनुसार अब ऐसी बात नहीं है। बिना जांच किये किसी भी जिले में पानी नहीं पिया जा सकता है।

76 सब डिवीजन में पानी जांच के लिए लैब बनना है। जहां पीएचइडी  छह माह पर पानी की जांच करायेगा। इस दिशा में एक साल पूर्व से काम शुरू हो गया है, लेकिन कहां और कितना काम हुआ है इसका सही जानकारी विभाग को नहीं है। ऐसे में पानी की शुद्धता जांच करने में परेशानी हो रही है। अधिकारियों के मुताबिक विभाग में लैब में पानी जांच किया जा रहा है।

इस साल और बढ़ गया आंकड़ा 

सात निश्चय के तहत नल जल योजना के दौरान जब काम शुरू हुआ, तो इस साल पीएचइडी ने पानी की गुणवत्ता की जांच शुरू करायी। इसकी रिपोर्ट और चौकाने वाले आये। 2019 के आंकड़ाें में पाया गया है कि 5085 वार्ड आर्सेनिक, 3814 वार्ड फलोराइड और 21,589 वार्डों में आयरन की मात्रा पानी में अधिक है।  विभाग का यह आंकड़ा अप्रैल महीने तक का है।

नया टोला, फुलवारी, बोरिंग रोड, खाजपुरा, शिवपुरी, राजापुरपुल, आकाशवाणी, आशियाना रोड, इंद्रपुरी, कंकड़बाग एवं राजेंद्रनगर से अगस्त में 26 सैंपल लिये गये। जब सैंपल का जांच कराया गया, तो इनमें 17 जगहों का पानी पीने के लायक नहीं है। इनके पीने से डायरिया, टायफाइड, त्वचा रोग, मूत्र रोग और पेट संबंधी बीमारी होने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि शोध में यह बात सामने आयी है कि पुराने सीवरेज के साथ पीने का पानी भी पाइप से जा रहा है, जिसके फटने से पानी खराब हो रहा है। सीवरेज में गाद, पॉलिथिन भरने से पानी फ्लो बाधित हो रहा है और गंदा पानी जमीन के अंदर जा रहा है। इस कारण से बाेरिंग का पानी भी दूषित हो रहा है।

चीयर्स डेस्क 

loading...
Close
Close