फिटकरी, चूने से दूर होगा पानी से आर्सेनिक-फ्लोराइड

पानी में आर्सेनिक, फ्लोराइड तथा अन्य भारी तत्वों की अधिक मात्रा से परेशान क्षेत्र के लोगों के लिए राहत की बात है। जल निगम में अधीक्षण अभियंता रहे तथा वर्तमान में युनाइटेड कालेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड रिसर्च में विजिटिंग फैकेल्टी एलपी सिन्हा के दावे अगर सच हैं तो उनका शोध ऐसे लोगों के लिए वरदान साबित होगा। उनकी ओर से इजात तकनीकी के अंतर्गत मात्र तीन बाल्टी, चूना और फिटकरी की मदद से इन खतरनाक तत्वों को पानी से बाहर किया जा सकता है। खास यह कि जल शोधन यंत्र को घर में ही बनाया जा सकता है और पानी शोधन की प्रकिया पर खर्च भी बहुत कम आएगा।

केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय ने इनके शोध का विवरण मांगा है, जिसे डॉ.माशेलकर की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय तकनीकी समिति में विचार के लिए रखा जाएगा। एलपी मिश्रा ने बताया कि जल शोधक यंत्र को बनाने में तीन बाल्टियों की जरूरत होगी। इनमें एक बाल्टी 25 लीटर तथा दो अन्य 22-22 लीटर की हों। इन बाल्टियों में टोटी भी लगी हो। 25 लीटर वाली बाल्टी में थोड़ा सा पानी लें। फिर उसमें एक चौथाई चम्मच फिटकरी और पांच चम्मच चूने का गाढ़ा घोल डालें। इसके बाद बाल्टी भर दें। इस दौरान आर्सेनिक, फ्लाराइड आदि सभी तत्व नीचे बैठ जाएंगे। तकरीबन दो घंटे बाद टोटी के माध्यम से पानी को 22 लीटर की बाल्टी में भर लें। इस पानी में भी भारी तत्वों के कुछ अंश घुले हो सकते हैं।

इसलिए कुछ देर बाद इसे दूसरी 22 लीटर की बाल्टी में भर लें। एलपी मिश्रा का दावा है कि अब पानी पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुसार पीने योग्य होगा। उनका दावा है कि  फिटकरी और चूना पानी में घुले भारी तत्वों से क्रिया कर लेते हैं। इसलिए शुद्धता और बढ़ जाती है। उन्हाेंने दो साल पहले प्रधानमंत्री तथा अन्य संबंधित विभागों को इस शोध की बाबत रिपोर्ट भेजी थी, जिसे अब संज्ञान में लिया गया है। उनसे पूरी रिपोर्ट एक बार फिर मांगी गई है। समिति तकनीकी और पानी शोधन में होने वाले खर्च का अध्ययन करेगी।

चीयर्स डेस्क 

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