निदा फाज़ली को भारी पड़ा था साहिर पर कमेंट

निदा फाज़ली जब मुम्बई पहुंचे तो वह दौर बाॅलीवुड के अलावा साहित्यक और संस्कृतिक गतिविधियों के लिए भी जाना जाता था जल्दी ही उन्हें साहित्यिक गलियारों में जगह मिल गई. सबसे पहले उन्हें अली सरदार जाफरी ने साहित्यिक पत्रिका ’गुफ्तगू’ में उन्हें काम दिया. यहां से उनका सफर जारी हो गया. शाम की शराब और रात के खाने के लिए अक्सर वह साहिर लुधियानवी के बंगले पर जाया करते थे. वहां साहिर की शायरी की तारीफ और वाह वाह के बदले उम्दा शराब भी मिलती थी और रात का खाना भी. लेकिन एक दिन नशे की झोंके में निदा ने साहिर की शायरी पर कुछ कमेंट कर दिया, उस कमेंट ने बहस और फिर बाकायदा विमर्श की शक्ल अख्तियार कर ली. जिसका खामियाजा निदा को भुगतना पड़ा कि उस रात साहिर ने उन्हें बिना खाना खिलाए ही विदा कर दिया. लेकिन चलते वक्त उनकी जेब में कुछ रुपए जरूर डाल दिए. वह रात भी और दूसरी रातों की तरह गुजर गई लेकिन साहिर की नाराजगी कम नहीं हुई.

बाॅलीवुड के मशहूर गीतकार शकील आज़मी बताते हैं कि साहिर ने निदा से अपनी नाराज़गी तब जाहिर की जब निदा ने आर. डी. बर्मन के संगीत के साथ किसी फिल्म के लिए एक गीत लिखा. गीत फाइनल भी हो गया लेकिन साहिर ने प्रोडयूसर पर दबाव बनाकर उस गीत को फिल्म से बाहर करवा दिया. आर. डी. बर्मन ने स्टूडियो बुलाकर निदा से माॅफी मांगी और कुछ रुपए भी दिए.

शकील आज़मी के अनुसार साहिर ने निदा से अपनी नाराज़गी का इज़हार तब भी किया जब फिल्म राइटर्स एसोसिएशन की तरफ से एक मुशायरे का अयोजन किया गया था जिसकी अध्यक्षता साहिर लुधियानवी कर रहे थे. साहिर ने अपनी पोज़ीशन का इस्तेमाल करते हुए आयोजकों से कहा कि अगर वो लोग निदा को न बुलाएं वर्ना मैं नहीं आउंगा. आयोजकों ने साहिर के दबाव में निदा को शायरों की सूची से निकाल दिया.

लेकिन निदा ने शराब नहीं छोड़ी और मिल गई उन्हें जगजीत सिंह की आवाज़, इसके बाद आया ‘इनसाइट’ जिसने निदा को शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचा दिया. फिर वक्त ने करवट ली, निदा ने मुशायरों का रुख किया और देखते ही देखते वह मुशायरों के बड़े शायर बन गए. उनके दोस्तों में जुबैर रिजवी, बाकर मेहदी और जय प्रकाश चैकसे भी थे. चैकसे बड़े फिल्म प्रोडयूसर और पत्रकार भी थे. इसी कारण राजकूपर से लेकर महेश भटट तक उनसे मिलते जुलते रहते थे. इसी का परिणाम था कि महेश भटट ने निदा फाज़ली को ’तमन्ना’ और ’चाहत’ फिल्म के लिए गीत लिखने का काम दे दिया और यहीं से निदा फाज़ली की गाड़ी चल पड़ी. चैकसे ने राजकपूर के यहां निदा को सहायक निर्देशक के रूप में भी काम दिला दिया था. लेकिन उनके गीत मशहूर होने लगे और फिर देखते ही देखते निदा फाज़ली बाॅलीवुड पर छा गए.

8 फरवरी को निदा फाज़ली की तीसरी पुण्य तिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि !

सुहेल वहीद 

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