नशा पिलाके गिराना तो सबको आता है;

नशा पिलाके गिराना तो सबको आता है;
मज़ा तो जब है कि गिरतों को थाम ले साकी;
जो बादाकश थे पुराने वो उठते जाते हैं;
कहीं से आबे-बक़ा-ए-दवाम ले साकी;
कटी है रात तो हंगामा-गुस्तरी में तेरी;
सहर क़रीब है अल्लाह का नाम ले साकी।

Allama Iqbal

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