नई आबकारी नीति से फुटकर और देशी वाले परेशान

यूपी की नई आबकारी नीति से फुटकर शराब विक्रेता परेशान हैं। इस नीति के अंतर्गत सिक्योरिटी मनी जमा करने में थोक व फुटकर विक्रेताओं के लिए दोहरी व्यवस्था लागू की गई है, जिससे फुटकर विक्रेता को सिक्योरिटी मनी पांच साल तक बंधक रहेगी। यानी उनकी उतनी धनराशि पांच साल तक बिना ब्याज के बंधक रहेगी। नई नीति से देशी शराब के ठेकेदार भी नाराज़ हैं।

नई नीति के अनुसार लाइसेंस फीस की गारंटी मनी में भी बडा़ अन्तर रखा गया है। इससे देशी शराब के कारोबारी हैरान हैं। नई व्यवस्था अनुसार देशी शराब कारोबारी लाइसेंस फीस की 80 प्रतिशत धनराशि राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी) के रूप में जमा करने के लिए बाध्य होंगे। डाकखाने में खाता खुलवा कर ये रकम जमा करनी होगी। दूसरी तरफ अग्रेजी शराब व बीयर के थोक कारोबारियों को बडी राहत देते हुए उनसे लाइसेंस फीस का मात्र 10 प्रतिशत ही गारंटी मनी जमा करानी की व्यवस्था नई नीति में की गई है। इसे बैंक से ड्राफ्ट बनवाकर या डाकखाने से एनएससी खरीदकर जमा करना होगा। बैंक ड्राफ्ट से जमा गारंटी मनी अनुज्ञापी या ठेकेदार लाइसेंस समाप्त होने पर किसी भी समय वापस ले सकते हैं। जबकि देशी शराब के ठेकेदारों के लिए ये व्यवस्था नहीं की गई है। उनकी गारंटी मनी पांच साल तक के लिए बंधक रहेगी। हालांकि आबकारी विभाग ने पांच साल की शर्त नहीं लगाई है लेकिन डाकघर के अपने नियम कानून हैं। वे पांच साल से पहले एनएससी का भुगतान नहीं करते, हालांकि पांच साल के बाद उस पर ब्याज भी देते हैं।

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यूपी की नई आबकारी संशोधित नीति 2019-20 के अनुसार सिक्योरिटी मनी जमा करने में दोहरा नियम लागू किया गया। इस नीति में थोक अनुज्ञापी (सीएल-टू या एफएल-टू) को सिक्योरिटी मनी, एनएससी या एफडीआर के माध्यम से जमा करने की सुविधा दी गई है। थोक अनुज्ञापी अपनी सिक्योरिटी मनी दोनों तरीको से जमा कर सकते हैं, जबकि फुटकर अनुज्ञापियों के लिए अलग नियम बनाया गया है, जिसमें फुटकर अनुज्ञापी डाकखाने से एनएससी यानी राष्ट्रीय बचत पत्र के माध्यम से ही सिक्योरिटी मनी जमा कर सकते हैं। इस व्यवस्था से उन अनुज्ञापियों को परेशानी हो रही है, जिनकी दुकान एक वर्ष के बाद छूट जाएगी और उनकी डाकघर में बंधक बनी धनराशि, जो एनएससी के रूप में है, उसे भुनाने के लिए पांच साल तक इन्तजार करना होगा।

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यूपी शराब एसोसिएशन के महासचिव, श्री कन्हैया लाल मौर्य ने इस दोहरी नीति पर दुख जताया है। उनके अनुसार इस प्रकार की नीति से देशी शराब के ठेकेदारों पर दोहरी मार पड़ेगी। सरकार को असका तत्काल निदान करना चाहिए वर्ना देशी शराब के ठेकेदार दिन पर दिन कम होते जाएंगे, क्योंकि पांच पांच साल के लिए अपना पैसा कौन फंसाएगा जबकि उसका लाइसेंस एक ही साल में समाप्त हो जाएगा। देशी शराब के कई अनुज्ञापियो ने इस प्रकार की दोहरी नीति अपनाने के लिए रोष व्यक्त किया है। इससे पहले तक सिक्योरिटी मनी थोक व फुटकर अनुज्ञापी दोनों ही एफडीआर या एनएससी या डीडी के माध्यम से जमा कर सकते हैं। गौरतलब है कि लखनऊ जनपद  में देशी, विदेशी शराब और बीयर की करीब 888 फुटकर अनुज्ञापी हैं।

चीयर्स डेस्क

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