यूपी में तालाबों का होगा शुद्धिकरण

यूपी में बागपत जिले के 245 ग्राम पंचायतों में तालाब और जल स्रोत प्रदूषण मुक्त किए जाएंगे। तालाबों के पास पक्का घाट बनाकर मवेशियों को पीने योग्य पानी, सार्वजनिक कार्यों के उपयोग में लाया जाएगा। इसके लिए विभिन्न कार्य कराए जाएंगे। भूगर्भ जल रिचार्ज को भी प्राथमिकता दी जाएगी। जिससे ऊपर के साथ-साथ नीचे का पानी भी शुद्ध हो सके।

जिले में 245 ग्राम पंचायत हैं, जिसमें 449 के करीब तालाब हैं। अधिकांश तालाब दूषित है और ये गंदगी से अटे पड़े हैं। ओवर फ्लो तालाब भी परेशानी का कारण बने है। शासन ने गांवों के तालाबों के पानी को शुद्ध करने की कार्य योजना बनाई है। ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी के निकट तालाबों के किनारे पक्का घाट, मवेशियों को पीने योग्य पानी और सर्वाजनिक कार्यों के लिए उपयोगी बनाया जाएगा। इसके लिए गांवों में आबादी के निकट तालाबों में घरेलू एवं सामुदायिक तरल अपशिष्ट पदार्थो का उचित प्रबंधक किया जाएगा। इससे तालाबों का जल प्रदूषित नहीं होगा। गंदे पानी को रोकने के लिए घरेलू, सामुदायिक तरल अपशिष्ट का उचित प्रबंधन मनरेगा योजना से किया जाएगा। प्रमुख सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने बागपत सहित प्रदेश के सभी डीएम को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है।

घरेलू तरल वेस्ट का ऐसे होगा प्रबंधन

घरेलू तरल वेस्ट का प्रबंधन किया जाना चाहिए। इसके लिए सोकपिट बनाया जाएगा। तीन फीट लंबाई, तीन फीट चौड़ाई, तीन फीट गहराई में मिट्टी में एक घनाकार पिट खोदा जाता है। पिट को निर्धारित आकार के पत्थर के टुकड़ों से भर दिया जाता है। शीर्ष पर पिट को सहायता सामग्री जैसे पेड की टहनी, बोरी से ढक दिया जाता है। उसके ऊपर रेत बिछा दिया जाता है। जिसके अंदर आने वाला पानी खुला न रहे। इसके अलावा सामुदायिक गंदे पानी के प्रबंधन के लिए गांव से बाहर सोकपिट का निर्माण किया जा सकता है। सार्वजनिक स्थानों पर वाटर स्टैंड पोस्ट, हैंड पंप, सार्वजनिक कुंआ ओवर फ्लो से ग्रे-वाटर उत्पन्न होता है।

चियर्स डेस्क 

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