झारखंड में शराबबंदी की मांग

झारखंड हाइकोर्ट में शुक्रवार को राज्य में शराबबंदी को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। एक्टिंग चीफ जस्टिस हरीश चंद्र मिश्र और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। इसमें शराब के दुष्परिणाम को रोकने के लिए राज्य सरकार को विभिन्न विभागों से चर्चा कर सुझाव देने को कहा गया। खंडपीठ ने सरकार से पूछा कि 21 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को शराब के नशे से दूर रखने की आपके पास क्या योजनाएं  हैं।
खंडपीठ ने माैखिक रूप से कहा कि शराब के सेवन से युवाओं में नशे की लत लग रही है। इसका असर परिवार और समाज पर पड़ रहा है. युवाओं को नशे से दूर रखने का कोई मैकेनिज्म नहीं है। 21 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को शराब नहीं बेचना, लिखा होना काफी  नहीं है।
शराब के नशे से युवाओं को कैसे बचाया जाये, इस पर विचार करने की जरूरत है। हाइकोर्ट ने पूछा है कि नशा करने से रोकने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है या उठायेगी? उसे कैसे रोका जायेगा? उस पर सरकार अपना विस्तृत सुझाव अगली सुनवाई के पूर्व प्रस्तुत करें। मामले की अगली सुनवाई के लिए खंडपीठ ने 22 नवंबर की तिथि निर्धारित की गई है।
इससे पूर्व प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता राजीव रंजन मिश्र ने खंडपीठ को बताया कि शराब का सेवन करना हानिकारक है। युवा देश की ताकत हैं उन्हें शराब के नशे से दूर रखने की जरूरत है। इसके बावजूद युवा शराब के नशे के आदी बन रहे हैं। युवाओं को पथ भ्रष्ट होने से रोकने के लिए सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया है। सरकार की गलत शराब पॉलिसी की वजह से युवाओं में नशे की लत लग रही है। शराब विक्रेता अपने फायदे के लिए स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थियों को भी शराब बेचते हैं। यह किसी से छुपा नहीं है।
19 वर्षों में नहीं हुआ कोई सर्वे
अधिवक्ता राजीव रंजन मिश्र ने कहा कि झारखंड गठन के 19 साल में राज्य सरकार ने शराब के सेवन से हो रहे दुष्परिणाम को लेकर एक बार भी सामाजिक सर्वे नहीं कराया है। स्कूल जानेवाले छात्रों को भी शराब की लत लग गयी है।
छात्र नशे के कारण आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं। शाम में युवा वर्ग दोपहिया वाहनों या कार या होटलों में बैठ कर शराब पीते नजर आते हैं। मालूम हो कि प्रार्थी शिवकांत पांडेय ने जनहित याचिका दायर कर राज्य में शराबबंदी की मांग की है।
चीयर्स डेस्क 
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