कश्मीर में शराब की बढ़ती जा रही मांग

जम्मू कश्मीर में शराब पर प्रतिबंध की मांग वहां के सामाजिक संगठन काफी अरसे से करते आ रहे हैं , लेकिन गौर करने लायक बात है कि वहां आज तक किसी भी सरकार ने शराब बंदी की बात तक नहीं छेड़ी। अब विशेष राज्य का दर्जा समाप्त होने के बाद वहां शराब की बिक्री पर क्या असर पड़ेगा ये तो वक़्त ही बताएगा।

जम्मू-कश्मीर में 2016-17 में शराब की बिक्री 13 प्रतिशत बढ़कर, 5.65 करोड़ बोतल हो गई है।आम लोग शराब की बढ़ती खपत से हताश हैं, क्योंकि यह ‘सामाजिक विकृति पैदा कर रहा है। राज्य में, विशेष रूप से कश्मीर में शराब पर प्रतिबंध लगाने वाले समूहों का तर्क है कि यह मुस्लिम बहुल्य राज्य के सामाजिक ताने-बाने को बर्बाद कर देगा।

आबकारी विभाग के आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि 2012-13 में अनुमानित 5 करोड़ बोतल शराब की खपत थी। 2016 -17 में ये बढ़कर 5.65 करोड़ हो गई, इस तरह पिछले पाँच 5 वर्षों में खपत दर 13 प्रतिशत से अधिक हो गई।

कुल मिलाकर 27.2 करोड़ शराब की बोतलें, जिनमें भारतीय निर्मित विदेशी शराब (IMFL), J & K विशेष व्हिस्की (देशी शराब), बीयर और पीने के लिए तैयार (RTD) का उपभोग वित्तीय वर्ष 2012-13 से 2016 -17 तक जम्मू और कश्मीर में शराब उपभोग्ता द्वारा किया गया।

कश्मीर घाटी में, आबकारी विभाग ने श्रीनगर-बडगाम-गांदरबल रेंज में 2014-15 में आईएमएफएल की 11.50 लाख बोतलों की बिक्री दर्ज की, अगले वित्तीय वर्ष 2015-16 के दौरान आंकड़ों में वृद्धि हुई और ये 15.25 लाख बोतलों तक पहुंच गई।

आबकारी आंकड़ों के अनुसार, बियर कश्मीरियों का पसंदीदा पेय है क्योंकि मार्च 2014 से नवंबर 2016 तक श्रीनगर-बडगाम-गांदरबल रेंज में 52 लाख बोतलें बेची गईं जबकि आरटीडी की कुल 40,729 बोतलें बेची गईं।

कश्मीर सेंटर फॉर डेवलपमेंट एंड सोशल स्टडीज (केसीडीएस) के सदस्य शकील कलंदर ने कहा कि सरकार को राज्य में शराब की बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध लगाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘राज्य में इसकी बिक्री पर प्रतिबंध लगाना सरकार की ओर से उचित होगा। सरकार को हमेशा राजस्व के चश्मे से सब कुछ नहीं देखना चाहिए, बल्कि ऐसे फैसले भी लेने चाहिए जो हमारी भावी पीढ़ी की रक्षा करेंगे। ”

कश्मीर आर्थिक गठबंधन के अध्यक्ष, मुहम्मद यासीन खान ने भी राज्य में शराब की बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की। “जैसा कि आबकारी विभाग के आंकड़े बताते हैं कि व्यापार कितना बढ़ता जा रहा है, यह चिंता का कारण होना चाहिए। धार्मिक नेताओं सहित समाज को आत्मनिरीक्षण कर अपनी भावी पीढ़ी को इस बुराई से बचाना होगा।

आबकारी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि शराब की बिक्री से राज्य को भारी राजस्व प्राप्त होता है। “2016-17 के दौरान, राज्य ने शराब डीलरों से एकत्र करों से 570 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया। हालांकि, इस पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय राज्य सरकार के पास है। ”

एक पक्ष ये भी है कि J & K एक पर्यटन स्थल है और शराब पर प्रतिबंध लगाने से पर्यटकों की आमद पर ‘नकारात्मक प्रभाव’ पड़ेगा।

चीयर्स डेस्क

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