ग्राम सभा को शराब ठेके बंद कराने का मिलेगा अधिकार

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर अपने दूसरे कार्यकाल में प्रत्येक कदम एकदम सधे हुए राजनीतिज्ञ की तरह रख रहे हैं। उन्होंने पहली विधिवत कैबिनेट की बैठक में ही अपने विजन को स्पष्ट कर दिया है। मुख्यमंत्री ने विधानसभा चुनाव के दौरान ही स्पष्ट कर दिया था कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा उनकी प्राथमिकता में रहेगा। इसकी एक झलक 18 नवम्बर की कैबिनेट में देखने को मिली।

साधे कई निशाने

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने गांवों में शराब बंदी के निर्णय से एक साथ कई निशाने साधे हैं। उनका यह निर्णय एक दूरगामी परिणाम लेकर सामने आयेगा। क्योंकि शराब बंदी का निर्णय किसी भी सरकार के लिए आसान नहीं होता है। शराब बिक्री से सरकार को भारी संख्या में राजस्व की प्राप्ति होती है। लेकिन मनोहर लाल ने यह कदम उठाते हुए एक मिनट की भी देरी नहीं की। उनके निर्णय के पीछे कारणों की पड़ताल करें तो हम देखेंगे कि हरियाणा की गांवों में शराब को लेकर काफी आक्रोश देखा जाता है। कई बार महिलाओं ने इस शराब बिक्री के खिलाफ मोर्चा भी खोला है।

कई जिलों व गांवों में महिलाओं के उग्र रूप देखने को मिले हैं। शराब बिक्री के खिलाफ महिलाओं का आक्रोश भी जायज है। इस शराब से सबसे ज्यादा उनको परेशानी होती है। पहली बात यह कि गांव में शराब बिक्री होने से शराबी अक्सर गांव में मंडराते रहते हैं और महिलाओं पर कमेंट करते हैं। जिसके कारण महिलाओं को काफी शर्मिन्दगी उठानी पड़ती है। दूसरी बात यह कि गांव में शराब बिक्री होने से अक्सर पुरूष व युवा इसके लती हो जाते हैं। जिसके कारण महिलाओं के घर का बजट खराब हो जाता है और बच्चों पर इसका विपरित प्रभाव पड़ता है। अब गांवों में शराब बिक्री बंदी होने से महिलाओं को जहां शर्मिन्दगी से बचाया जा सकता है। वहीं बच्चों को एक बेहतर माहौल दिया जा सकता है।

दस प्रतिशत आबादी की सहमति जरूरी

गांव में शराब बिक्री पर प्रतिबंध तो जरूर लगा दिया गया है। लेकिन इसके लिए ग्राम सभा के दस प्रतिशत आबादी की सहमति जरूरी है। यही नहीं ग्राम सभा की दस प्रतिशत आबादी द्वारा सरकार को लिख कर दे देने पर गांव में पहले से खुले ठेके भी बंद हो जाएंगे। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की सरकार इसे कानूनी रूप देने के लिए 26 नवम्बर को विधानसभा के विशेष अधिवेशन में बिल पेश करेगी।

चीयर्स डेस्क 

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