गुम हो गया वो दमन का मज़ा

दमन केंद्र शासित प्रदेश होने के साथ ही अपने समुद्री किनारों पर खुलेपन के लिए, गुजरात ही नहीं देशभर में अपनी खास पहचान रखता था। लेकिन प्रशासन की टेढ़ी नजर ने इस खुलेपन पर रोक लगा दी है, जिसके बाद दमन को लेकर लोगों में वह उत्साह नहीं बचा है। वीकेंड पर भी दमण के समुद्र किनारे सूने पड़े रहते हैं। पर्यटकों की संख्या में आई यह कमी दमण के पर्यटन उद्योग को खासा प्रभावित कर रही है।

समुद्र किनारे शराब पीने के अवसर का लाभ लेने के लिए गुजरात और देश के दूसरे हिस्सों से आने वाले पर्यटकों में दमन का विशेष आकर्षण था। इनमें भी जैमपोर, मरवड और देवका बीच अपनी इसी खूबी के लिए पर्यटकों की पहली पसंद रहते थे। इन पर्यटकों की आवभगत के लिए इन बीच पर कतार में स्टाल लगे रहते थे, जिनपर खाने-पीने की चीजें और शराब आसानी से मिल जाया करती थी। इस वजह से खासकर वीकेंड पर इन बीचों पर खासी चहल-पहल रहती थी।

बीते कुछ महीनों से दमन प्रशासन ने खुले में शराब पीने के तौर-तरीकों पर आंखें तरेरी हैं। यह जमीन वन विभाग की होने की बात कह यहां लगे स्टॉल्स हटा दिए गए हैं। साथ ही खुले में शराब पीने पर भी रोक लगा दी है। दमन आने वाले पर्यटकों को शराब का लुत्फ उठाना है तो उन्हें या तो रेस्टोरेंट्स-बार का रुख करना होगा या फिर होटलों के बंद कमरों में बोतलें खोलनी होंगी।

प्रशासन की इस सख्ती ने उन पर्यटकों को खासा निराश किया है, जो समुद्र बीच पर रेत में बैठकर या फिर अपनी गाड़ी में ही शराब की बोतलें खोलकर समुद्र की लहरों का नजारा किया करते थे। प्रशासन के इस फैसले के बाद से दमण में समुद्र किनारे के इन बीच पर होने वाली चहल-पहल भी थम सी गई है। तफरीह के लिए दमण आने वाले लोगों की संख्या में भी खासी कमी आई है।

दमन प्रशासन के इस फैसले से समुद्र किनारों पर पर्यटन का अर्थशास्त्र गड़बड़ा गया है। पहले जब भी कोई व्यक्ति मौजमस्ती के लिए दमन आता था, इन बीच पर बजट खर्च में उसकी जरूरतें पूरी हो जाती थीं। नई व्यवस्था के बाद बार या रेस्टोरेंट में बैठकर शराब पीने से वह लुत्फ नहीं मिलता जो खुले में समुद्र किनारे बैठकर पीने से मिलता था। साथ ही जेब भी ज्यादा ढीली करनी पड़ रही है। इसलिए पहले जो पर्यटक हर हफ्ते दमन का चक्कर लगा लेते थे, उन्होंने अपने दौरों की संख्या घटा ली है।

 चीयर्स डेस्क

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