खराब हो जाता है आरओ का पानी

आरओ के पानी को लेकर तरह तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं। आरओ के पानी को लेकर कुछ लोग कहते हैं कि कभी खराब नहीं होता। लेकिन ऐसा नहीं है। यह भी खराब हो जाता है। कुछ समय के बाद सड़ने लगता है। माना जाता है कि बोतल में मिलने वाला पैकेज्ड ड्रिकिंग वाटर चाहे जितने भी दिन रखा रहे खराब नहीं होता है। लेकिन आरओ से फिल्टर होने के बाद पानी अगर सही तापमान यानी फ्रिज में रखा है तो करीब एक हफ्ते तक ठीक रहता है। लेकन इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं है किसी कम्पनी का। कोई पैकेज्ड वाटर बोटल पर यह बात नहीं लिखी होती है कि कितने दिनों तक यह ठीक रहेगा और आरओ कम्पनियां तो यह बताने का कष्ट बिल्कुल भी नहीं करती हैं। डाक्टर दवा के साथ साथ यह भी लिखने लगे हैं कि बीमारियों से बचना है तो आरओ लगवाइये। जिसका नतीजा है कि धड़ल्ले से लोग आरओ लगवा रहे हैं।

लेकिन आरओ कितने अधिक पानी की बर्बादी करता है इसका अंदाजा नहीं है। एक अनुमान के मुताबिक दिल्ली में घरों में लगे आरओ से हर दिन जितना पानी बर्बाद हो जाता है। इतने पानी से करीब 20 लाख लोगों की प्यास बुझाई जा सकती है। यह भी काफी दिनों से चर्चा चल रही है कि आरओ से निकलने वाली पानी का क्या किया जाए। चूंकि आरओ पानी से सारी अशुद्धियां निकाल देता है तो बर्बाद हुए पानी में प्रदूषण ज्यादा होता है। अगर इस पानी को पौधों में डालेंगे तो पानी के जरिए प्रदूषण पौधों में भी जाएगा। साथ ही, यह पानी जमीन के अंदर जाने पर जमीन के पानी को भी खराब करेगा। हालांकि, कुछ कंपनियों का यह दावा कि इस पानी को स्टोर करके गार्डनिंग कर सकते हैं। इस बेकार पानी को इस्तेमाल करने का बेस्ट तरीका है कि इसका इस्तेमाल कपड़ा धोने और साफ-सफाई में किया जाए।

एक मिथक है कि आरओ वॉटर से बाल धोने से फायदा होता है। चूंकि आरओ वॉटर से प्रदूषण फैलाने वाले कण निकल जाते हैं। इसलिए आरओ के पानी से बाल धोने से फायदा होना स्वाभाविक है। लेकिन कोई नहीं जानता और आरओ कम्पनियां खुद नहीं बता पाती हैं कि आरओ से निकलने वाला पानी किस इस्तेमाल का होता है। भारत में चूंकि अभी तक पानी की सफाई के लिए कोई प्राधिकरण का गठन नहीं हो पाया तो कोई संस्था ऐसी नहीं है जो आरओ के पानी के लिए आधिकारिक रूप से कुछ कह सके।
हां एनजीटी ने जरूर यह निर्देश जारी किए हैं कि आरओ के पानी के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए सरकार कड़े नियम कानून बनाए। लेकिन सरकार कब ना पाएगी अभी तक पता नहीं है। सरकार के पास इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि आरओ के पानी को लेकर जो जागरूकता फैलाई जानी चाहिए थी वह क्यूंकि नहीं हो पाई है। डाक्टरों द्वारा अंधाधुंध आरओ के पानी को पीने के लिए मरीजों को मजबूर करने के पीछे स्वाभाविक रूप से वही दवा कम्पनियों की तरह का सिंडीकेट काम कर रहा है जो डाक्टरों को मनचाहा दवा लिखने की तरह का कमीशन दे रही हैं।

चीयर्स डेस्क 

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