क्यों कोई बेटी नहीं ब्याहना चाहता इस गाँव में ?

यूपी के गोरखपुर जिले में कच्ची शराब के लिए बदनाम बहरामपुर दक्षिणी गांव में अपनी उम्र बहुत कम ही लोग पूरी कर पाते हैं।  शराब के चलते इस गांव में असमय मौत का आंकड़ा चौकाने वाला है। गांव में 85 विधवा ऐसी हैं जिनके पति ने शराब पीकर अपनी जान गवां दी। शराब के लिए बदनाम गांव के लड़कों की भी आसानी से शादी नहीं होती। यहां के सैकड़ों युवक कुवांरे हैं। उनकी शादी के लिए देखूवार आते ही नहीं हैं। गांव की बदनामी के कारण लड़की वाले सोचते हैं कि लड़का शराब पीता होगा?

दरअसल बहरामपुर दक्षिणी गांव को शहर से अलग राप्ती नदी करती है। यह गांव तिवारीपुर थाने की सरहद में हुआ करता था। पर भौगोलिक स्थिति ऐसी कि यहां तक पहुंचने के लिए तिवारीपुर पुलिस को दो थानों की सरहद से होकर जाना पड़ता था पुलिस को शहर के राजघाट और बेलीपार थाना क्षेत्र से होकर गुजरना पड़ता था। यह इलाका बेलीपार थाने के नौसढ़ चौकी से ठीक पीछे स्थित है। शराब के धंधेबाजों ने इस गांव को कच्ची शराब के गढ़ के रूप में इसीलिए चुना क्योंकि तिवारीपुर पुलिस को आते-आते वक्त लगेगा और सामने स्थित नौसढ़ चौकी की पुलिस सरहद विवाद के नाते आएगी नहीं। कच्ची शराब का धंधा यहा खूब फला-फूला नतीजा मौते भी खूब हुई और गांव की बदनामी भी।

जब गीड़ा के रूप में नए थाने की स्थापना हुई तो पुलिस अधिकारियों ने सबसे पहले इस गांव की सरहद को ही बदला। बहरामपुर दक्षिणी गांव को गीड़ा थाने की सरहद में शामिल कर दिया और गीडा थाने में नौसढ़ चौकी भी आ गई। लिहाजा जो पुलिस काफी दूर हुआ करती थी सरहद बदलने की वजह से अब ठीक गांव के आगे हो गई। पुलिस के सामने होने से डर भी पैदा होने लगा।  इस डर से गांव में कच्ची शराब का कारोबार 70 प्रतिशत खत्म हो गया है। 30 प्रतिशत कारोबार जो बचा भी है वह अब यहां की भट्ठियों से नहीं निकलता है बल्कि कहीं दूर से यहां सप्लाई की जाती है। यह सब पुलिस की सख्ती और हर वक्त मौजूदगी से संभव हुआ है।

चीयर्स डेस्क 

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