क्या पंजाब की नदियों का होगा नहरीकरण

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने केंद्र से सिंधु जल प्रणाली के अंतर्गत राज्य की तीन पूर्वी नदियों सतलुज, रावी और ब्यास का नहरीकरण करने का प्रस्ताव पेश किया ताकि पानी के संरक्षण और क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि को बढ़ाया जा सके।

जल के प्रबंधन और नियंत्रण के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाकर जल उत्पादकता बढ़ाने पर जोर देते हुए , कैप्टन अमरिंदर ने सतलुज नदी के साथ नहरीकरण परियोजना शुरू करने का सुझाव दिया, जिसमें 3 से 5 वर्ष की अवधि में लगभग 4000 करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता होगी। कार्य एक व्यवहार्यता अध्ययन के साथ शुरू हो सकता है जो अंतरराष्ट्रीय ख्याति के तकनीकी-आर्थिक विशेषज्ञों को सौंपा जा सकता है।

नई दिल्ली में एक बैठक के दौरान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को पेश किए गए अपने प्रस्ताव में, मुख्यमंत्री ने बाढ़ से बचाव के उपायों और सतलुज ,रवि और ब्यास के किनारे ढलान को सही करने के अलावा 985 किलोमीटर लंबे नदी तटबंधों पर तेज गति वाले आर्थिक गलियारों के निर्माण का भी सुझाव दिया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि ये तीन नदियाँ राज्य के लगभग 27% सिंचित क्षेत्र की ही सिंचाई करती हैं, जिससे भूजल का अत्यधिक दोहन होता है। कैप्टन अमरिंदर ने यह भी कहा कि नदी के पानी का दोहन करने की आवश्यकता है जो वर्तमान में मानसून के दौरान पाकिस्तान में बह कर चला जाता है। उन्होंने कहा, “नदियों के नहरबंदी और रिवर फ्रंट क्षेत्रों के विकास से गतिविधियों का विस्तार होगा, जिससे पंजाब की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा”।

चीयर्स डेस्क 

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