एक नदी जिसे भागीरथ की तलाश

यूपी नदियों का प्रदेश कहा जाता है, यहाँ सैकड़ों  की संख्या में छोटी और बड़ी नदियां पाई जाती हैं।  जिससे कुछ साल पहले तक पीने के पानी और सिंचाई  की कोई दिक्क्त नहीं होती थी लेकिन अब हालत बदल गए हैं। नदियां नाली बनती जा रही हैं। जिससे पीने के पानी का गंभीर संकट सामने खड़ा हो गया है।

बात यूपी के सीतापुर जिले के लहरपुर ब्लॉक की मुगलपुर ग्राम पंचायत से होकर बहने वाली उल्ल नदी की हो रही है, जो  सिमटकर अब केवल नाला रह गई है। दो गावों के बीच से निकली उल्ल नदी से लोगों को काफी राहत मिलती थी। लेकिन अब इस समय इस नदी का अस्तिव ख़तरे पड़ गया है। सोनरी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता विनय कुमार शुक्ला बताते हैं, “बारिश के समय मे गाँव का पानी इसी नदी में समाहित हो जाता था, लेकिन नदी पटने से अब काफी दिक्कतें बढ़ने लगी हैं। इससे पहले हमारे गाँव का जलस्तर काफी अच्छा हुआ करता था। लेकिन अब जलस्तर दिन पर दिन घटता चला जा रहा है।” जलस्तर घटने से पीने के पानी की समस्या से भी दो चार होना पड़ रहा है।

उल्ल नदी पीलीभीत से निकलकर गोला होते हुए लखीमपुर शहर से सटकर उत्तर की ओर बहती हुई सीतापुर जिले में रामपुर मथुरा के पास शारदा नदी में मिल जाती है। लखीमपुर शहर की लाइफ लाइन कहलाई जाने वाली उल्ल नदी को अब किसी प्रशासनिक  पहल की जरूरत है, जो इसे एक बार फिर से पुनर्जीवित कर सके।

प्रदूषण से ग्रस्त इस नदी का अस्तित्व अब खतरे में है। इसमें मिलने वाले सैकड़ों नाले इसे इतना गंदा कर चुके हैं कि यह नदी खुद किसी नाले से कम नहीं लगती। पूरा पानी काला हो चुका है, तैरती हुई जलकुंभी और पॉलीथिन इस नदी का जीवन बन चुकी है।अब इस नदी के पानी को न सिचाई में प्रयोग कर सकते है और न ही पीने में। शासन की ओर से भी इस नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए।

शहर की लाइफ लाइन कहलाए जाने का प्रमुख कारण यह है कि इसी नदी से इस शहर का जल स्तर कायम है। यदि यह नदी ही सूख गई तो इसके बगल के सैकड़ों गाँवों में जल स्तर कम हो जाएगा। जिससे  गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। ग्रामीण बताते हैं कि नदी को बचाने के लिए हमने कई बार जिलाधिकारी को शिकायती पत्र दिया। एन्टी भू माफिया पर शिकायत दर्ज कराया, लेकिन निराशा ही हाथ आयी। अगर जल्दी ही कोई समाधान नहीं ढूंढा गया तो यूपी की एक और नदी नाला बन कर रह जाएगी।

चीयर्स डेस्क 

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