उत्तर प्रदेश में फैला अवैध शराब का कारोबार

अवैध शराब का कारोबार प्रदेश  में बढ़ता ही जा रहा है। यह प्रदेश में कुटीर उद्योग का रूप लेता जा रहा है। कच्ची शराब की अवैध भट्ठियां चलाने वाले अपने चुनिन्दा ग्राहकों को फोन पर अवैध शराब पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। इस अवैध कारोबार में पुलिस व आबकारी विभाग की संलिप्तता दिखाई दे रही है। यही वजह है कि इस कारोबार से प्रतिवर्ष प्रदेश सरकार को अरबों रुपये का राजस्व हानि हो रही है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश भर में लगभग दस हजार कच्ची शराब की भट्ठियां अवैध तरीके धधक रही हैं। अवैध शराब बेचने वालों के लिए सख्त कानून बनाने की बात प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ने कही है जो जनहित में जरूरी है। अब देखना यह है इस सख्त कानून को कब तक अमलीजामा पहनाया जायेगा।


उत्तर प्रदेश में फैला अवैध शराब का कारोबार


बताते चलें कि प्रदेश के ज्यादातर जनपदों में जंगलों के आसपास बनी बस्तियों, गन्ने को खेत व तमाम गांवों में अवैध कच्ची शराब की भट्ठियां कुटीर उद्योग की तरह पनप रही है। इस कारोबार में लिप्त लोग मालामाल हो रहे है तो कच्ची मदिरा पीने पीने वाले अक्सर असमय मौत के शिकार हो रहे हैं। सिर्फ 40 रुपये में एक बोतल अवैध कच्ची शराब मिल जाती है। नशे के लती इसका सेवन करते हैं। यही लोग कभी-कभी शराब जहरीली हो जाने की वजह से अपनी जान भी गंवा देते हैं। इसी तरह की घटना कुछ दिन पूर्व कुशीनगर व आजमगढ़ में हुयी थी जहां कच्ची शराब पीकर दर्जनों लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी। इस अवैध कारोबार में पुलिस व आबकारी विभाग की भूमिका संदेहास्पद होती है। अवैध शराब कारोबार का कानून इस तरह है कि एक्साइज एक्ट में जो जेल जाता है वह जल्द ही जमानत चला भी आता है। मजे की बात यह है कि इन अवैध कच्ची शराब भट्ठियों को चलाने वाले पुरु ष जब जेल चले जाते हैं तो भी उनका धंधा बंद नहीं होता है। यह धंधा इन लोगों के घर की महिलाएं संभाल लेती है।


मलिहाबाद में आबकारी टीम ने पकड़ी कच्ची शराब की भट्ठी


बताते चलें कि अवैध कच्ची शराब का कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्राहकों की मांग को देखते हुए बड़े-बड़े गैलन में भरकर गांव स्तर पर छोटे-छोटे कारोबारी खरीदकर ले जाते हैं। जहां से ये लोग लोकल स्तर पर सप्लाई करते हैं।


 साभार  : राष्ट्रीय सहारा

 

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