इस वजह से दिल्ली में नहीं मिल रही विदेशी शराब

दिल्ली में पिछले छह सालों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब कोई भी बीयर कैफे ओक्टोफेस्ट प्रमोशन नहीं चला रहा है।  बताया जा रहा है कि शहर में जर्मन बीयर है ही नहीं।

अगर आपने भी किसी रेस्टोरेंट, लॉन्ज या नाइट क्लब में इंपोर्टेड वाइन ऑर्डर किया था और आपको बदले में माफ़ीनाम पत्र भेजा गया तो इसकी वजह यही है।  पता चला है कि दिल्ली की आबकारी विभाग में अब तक किसी भी नए ब्रांड का रजिस्ट्रेशन ही नहीं हुआ है।

कई होटलों ने बताया है कि इस असामान्य देरी से उन्हें व्यापार में काफी घाटा झेलना पड़ रहा है।  क्योंकि उनके पास इंपोर्टेड वाइन नहीं है।  एक होटल मालिक ने बताया कि आजकल वो ग्राहकों को मेन्यू के साथ एक अलग लिस्ट भी देतें हैं। जिसमें लिखा होता है कि उन्हें क्या-क्या नहीं मिल सकता है।

जानकार बताते हैं कि जिस प्रक्रिया में 15 दिन का समय लगता है इस बार दो महीने के बाद भी पूरा नहीं हुआ है।  बिग फिश वेंचर नाम से कैफे चलाने वाले उमंग तिवारी कहते हैं कि उनका स्टॉक भी ख़त्म हो चुका है लेकिन उनके पास इंतज़ार करने के अलावा और कोई उपाय नहीं है।

कई अन्य रेस्टोरेंट मालिक भी इस त्योहारी सीज़न में हो रही दुर्दशा पर अफ़सोस ज़ाहिर कर रहे हैं। एक्साइज़ विभाग के एक अधिकारी बताते हैं कि एक्साइज़ पॉलिसी में एक नयी धारा  जुड़ गयी है।  जिसके तहत सभी फॉरोन ब्रांड को सभी राज्यों में हॉलसेल प्राइस एक जैसा रखना होगा।  अधिकारी ने बताया कि सभी राज्यों के टैक्स प्रणाली अलग अलग है इसलिए यह कहीं सस्ता होता और कहीं बहुत महंगा।  इस वजह से ज़्यादातर ग्राहक हरियाणा से विदेशी शराब ख़रीदते हैं।  आबकारी विभाग के सामने चुनौती है कि वो दिल्ली से सटे सभी राज्यों में क़ीमत लगभग एक बराबर रखें।

चीयर्स डेस्क 

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