इस कच्ची शराब से पियक्कड़ों को लगेगा झटका

राजस्थान के उदयपुर में सुखेर थाना पुलिस ने मेहरों का गुड़ा गांव के जंगल में दबिश देकर 75 ड्रम वॉश नष्ट किया। सभी ड्रमों में महुए व गुड़ के साथ गंदे जूते, चप्पल, यूरिया व मरे हुए चूहे डालकर देसी शराब बनाई जा रही थी। कार्रवाई के दौरान मौके से आरोपी भाग छूटे। पुलिस ने उनमें से एक को नामजद कर मामला दर्ज किया। एसपी कैलाशचन्द्र विश्नोई ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिलने पर उपाधीक्षक महेन्द्र कुमार पारीक के नेतृत्व में सीआई डी.पी.दाधिच, एसआई कर्मवीर, हेड कांस्टेबल शिवचरण व कांस्टेबल जालमङ्क्षसह मय टीम मेहरो का गुड़ा गांव में सडक़ पर गाडिय़ां खड़ी कर करीब तीन किलोमीटर पैदल जंगल में पहुंची। टीम को देखते ही आरोपी वहां से भाग छूटे। तलाशी करने पर उन्हें आधा-आधा किलोमीटर की दूरी पर अवैध शराब बनाने के ठिकाने मिले। मौके पर भट्टियों के साथ ही 75 ड्रमों में वॉश भरा मिला। पुलिस ने वॉश व भट्टियों को नष्ट किया, वहीं एक जगह से 20 लीटर देसी महुए की शराब बरामद कर मामला दर्ज किया।

ड्रम खाली करते ही चौंक पड़े

पुलिस ने मौके पर जब महुआ वॉश के ड्रम को खाली किए तो सभी चौंक पड़े। आरोपियों ने देसी शराब के निर्माण के लिए महुआ व गुड़ के साथ ही उसमें गंदे जूते-चप्पल, यूरिया व मरे हुए चूहे डाल रखे थे, जिन्हें वे भट्टियों पर गर्म कर शराब बना रहे थे। जानकारों ने बताया कि आरोपी ड्रम में शराब में तेजी लाने के लिए गंदे सामान के साथ ही छिपकली, गंदे कपड़े व केमिकल डालकर लोगों की जान जोखिम में डालते हैं। पुलिस ने इस मामले में फरार आरोपियों में से मेहरों का गुड़ा निवासी दलीचंद पुत्र कूरा गमेती को नामजद किया।

कई इलाकों में बन रही शराब

अवैध व हथकढ़ मदिरा को रोकने के लिए सरकार ने आबकारी प्रवर्तन निदेशालय का गठन कर रखा है। पूरे राज्य में निदेशालय के पास भारी भरकम जाप्ता है। उनका काम सिर्फ अवैध व तस्करी की मदिरा को ही रोकना है लेकिन अभी भी यह पूरे राज्य के कई इलाकों में बनाई जा रही है। खासकर उदयपुर संभाग में यह बहुतायत मात्रा में जंगलों में बनाई जाकर आदिवासी अपने समारोह में इसी को काम में ले रहे हैं।

चीयर्स डेस्क 

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