आखिर क्यों बदलनी पड़ी आर्मी कैंटीन की शराब वितरण पॉलिसी

गुजरात ‘ड्राई स्टेट’ है। यही कारण है कि यहाँ अवैध शराब की बिक्री बहुत ज्यादा होती है। अवैध शराब खरीदने का सबसे बड़ा जरिया यहाँ की आर्मी कैंटीन है। यहाँ से मिलने वाली शराब गुजरात भर में काफी लोकप्रिय है लेकिन नए नियम के लागू होने के चलते यहां लोगों को आर्मी वाली शराब खरीदने में दिक्कतें आ रही हैं। ऐसा कहा जाता है कि सेना के जवान भी अपने कोटे से 2 से 4 शराब की बोतलें बेचकर अक्सर पैसा कमाते थे हालांकि शराब की अवैध तस्करी पर रोक लगाने के लिए सेना ने अपनी शराब बांटने वाली पॉलिसी में भी बदलाव किए हैं।

गौरतलब है कि गुजरात में शराबबंदी लागू है इसीलिए यहाँ शराब पीने वाले लोगों को आर्मी कैंटीन से शराब खरीदना आसान लगता था। ऐसा कहा जाता है कि आर्मी कैंटीन की शराब बहुत शुद्ध है। हाल ही में अहमदाबाद पुलिस को छापेमारी के दौरान सेना के कोटे वाली शराब अधिक मात्रा में मिली थी। इसके बाद अहमदाबाद की आर्मी कैंटोमेंट कैंटीन ने परमिट होल्डरों को शराब की बोतल देने के नियम में बदलाव किए हैं।

नए नियम के मुताबिक अब कैंटीन एक समय में परमिट होल्डर को केवल दो शराब की बोतल देगी। पहले एक परमिट होल्डर 4 बोतल पाता था। बदले गए नियम के अनुसार ड्यूटी पर तैनात अधिकारी बोतल पर साइन करके सील भी रिमूव करेंगे। इसके अलावा नई बोतल खरीदने के लिए पुरानी बोतलों को वैलिड साइन के साथ वापस करना भी जरूरी होगा।

यह नियम रिटायर्ड जवानों के लिए मान्य नहीं होगा। बता दें कि हर महीने सेवारत जवानों को पांच यूनिट और रिटायर्ड जवानों को 4 यूनिट शराब आर्मी कैंटीन की तरफ से दी जाती है। जबकि नायब सूबेदार और अधिकारियों के लिए कोटा 6 और 10 यूनिट होता है।

चीयर्स डेस्क 

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