‘आई जल’ स्टेशन एक अच्छी पहल

महाराष्ट्र, यूपी और तेलंगाना के गांवों में पीने का साफ पानी उपलब्ध कराने की ‘आई जल’ की पहल को स्टॉकहोम वॉटर वीक में सराहा गया। इसके तहत इन राज्यों में करीब 300 आई जल स्टेशन स्थापित किए हैं। 90% स्टेशनों का संचालन महिलाएं करती हैं। 10 लाख से ज्यादा लोगों को इन स्टेशनों से लाभ मिल रहा है। इन स्टेशनों से गांवों में बीमारियां तो घटी ही हैं, रोजगार भी पैदा हुए हैं। यह पहल दक्षिण भारत से शुरू हुई थी।

तेलंगाना के वारंगल जिले के गांव रंगासाइपेट में फ्लोराइड की अधिकता के कारण बच्चों से लेकर बुजर्गों की हडि्डयां और दांत कमजोर हो गए थे। यहां रहने वाली सी.पद्मजा भी परिजनों के अक्सर बीमार पड़ने से परेशान थीं और उन्होंने गांव में बदलाव लाने का फैसला किया। एनजीओ सेफ वाटर नेटवर्क की मदद से पद्मजा ने स्वच्छ जल वितरण केंद्र स्थापित किए। इससे करीब 5 हजार लोगों को कम दाम पर साफ पानी मिलने लगा। आई जल स्टेशन में बोरवेल के पानी को साफ करके पीने लायक बनाया जाता है। एक घंटे में स्टेशन से 1000 लीटर पानी साफ होता है। लोगों को 20 लीटर पानी के लिए 5 रुपए देने पड़ते हैं। इस बदलाव के बाद पद्मजा को अब इन गांवों के लोग वॉटर आंटी कहने लगे हैं। तेलंगाना में करीब 200 महिलाएं आई जल स्टेशन संभाल रही हैं।

36 और स्टेशन शुरू होंगे
संस्था की पहल से विदर्भ के गढ़चिरौली, चंद्रपुर, भंडारा और गोंदिया जिलों के 25 गांवों में स्टेशन लगाए गए हैं। सालभर में 36 और शुरू किए जाएंगे। नीति आयोग ने भी गढ़चिरौली जिले के बोधली और अमिर्जा के आई जल स्टेशन की सराहना की है। सेफ वॉटर नेटवर्क की वाइस प्रेसिडेंट पूनम सेवक बताया कि अब विदर्भ के कई परिवारों को साफ पानी मिल पा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रभावित गांवों की जानकारी सरकारी डेटा से मिलती है। इसके बाद टीम किट के जरिए गांवों में परीक्षण करती है। एक स्टेशन पर 10 लाख रु. तक खर्च आता है। इंडिया वाटर पोर्टल के मुताबिक 20 राज्यों के 100 जिलों में 6 करोड़ लोग फ्लोराइड युक्त पानी पीते हैं, ऐसे में आई जल स्टेशन से बड़ी मदद मिल सकती है।

चीयर्स डेस्क 

loading...
Close
Close