बच्चोें को शराब पीने के लिए उकसाते हैं टीवी के ललचाऊ विज्ञापन

क्या बच्चों का बचपन हजार खतरों से घिरा है, जवाब अधिकांश लोगों का हां में ही मिलेगा। जिन खतरों की बात की जाएगी उनमें टीवी विज्ञापनों की भ्रामक दुनिया दुश्मन नंबर एक पर है। ये बिन बुलाए मेहमान की तरह बच्चे के जीवन के हर हिस्से पर अधिकार जमाए बैठी है। टीवी पर दिखाए जाने वाले ललचाऊ और भड़काऊ विज्ञापनों ने बच्चों के विकास की रुपरेखा ही बदल दी है। एक नए शोध से पता चला है कि टीवी पर प्रसारित होने वाले विज्ञापन बच्चों को शराब पीने के लिए उकसाते हैं।

यह भी पढ़ें-  दुनिया का सबसे पुराना बार है डब्लिन का शाॅन्स बार

इस अध्ययन से ये भी पता चलता है कि टीवी पर आने वाले विज्ञापन जो मूल रूप से शराब पीने के लिए किसी प्रकार का लालच नहीं पैदा कर रहे होते हैं, वो भी बच्चों के दिमाग पर मस्ती करने का प्रभाव जरूर डालते हैं। इसमें कहा गया कि बच्चा जब टीवी देख रहा होता है तो वह अन्य कार्यों की अपेक्षा अधिक एकाग्र होता है और टीवी पर जो आकृतियां आ जा रही होती हैं, उन्हें वह अपने आस पास, घर के सदस्यों जैसा ही अनुभव करता है।

यह भी पढ़ें-  शराब कंपनियों के सोडा पानी विज्ञापन भी बंद

इसमें यह बात भी सामने आई कि बच्चों को विज्ञापन की श्रंखला देखने में ज्यादा मज़ा आता है बजाए उनके लिए बने किसी कार्यक्रम के। अध्ययन का निष्कर्ष है कि विज्ञापन चूंकि लालच पैदा करने का सबसे प्रभावी माध्यम है, इसलिए विज्ञापनों को इस सतर्कता से तैयार करना चाहिए कि अगर उसे कोई बच्चा भी देखे तो उस पर प्रतिकूल प्रभाव कम से कम पड़े।

यह भी पढ़ें- पीकर गाड़ी चलाई तो 40,000 तक जुर्माना, डीएल भी गया

ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ वैस्टर्न के शोधकर्ताओं ने दो माह तक अध्ययन किया। अध्ययन में पता चला कि बच्चों का दिमाग एक स्पंज की तरह होता है, वह जो कुछ देखते हैं वह उनमें बहुत जल्द समा जाता है। अध्ययन से पता चलता है कि टीवी विज्ञापनों से बच्चे शराब को मौज मस्ती, दोस्ती और फिजीकल एक्टिविटी से संबंधित सस्ती चीज मानने को प्रेरित होते हैं। इय अध्ययन में यह बात भी सामने आई कि टीवी के विज्ञापनों से प्रेरित बच्चों में फिजिकल एक्टिविटी के प्रति अधिक उत्साह है। टीवी विज्ञापनों से प्रेरित बच्चे पहली बार नशा करने में ज्यादा हिचकिचाते नहीं हैं। इसकी अपेक्षा फिल्मों के सीन इन बच्चों पर अत्यधिक कुप्रभाव डालने में सफल नहीं हो पाते। शोध का कहना है कि किसी भी फिल्म को कोई भी सीन किसी प्रकार का लालच पैदा करने के लिए नहीं तैयार किया जाता है।

चीयर्स डेस्क

loading...
Close
Close