स्टार्ट अप का नया अड्ड़ा पब एंड बाॅर

दिल्ली के कनॉटप्लेस में 25 वर्षीय अक्षय अपने वर्कप्लेस पर लैपटॉप पर काम कर रहे हैं। पीछे से धीमी आवाज में म्यूजिक बजने की आवाज आ रही है और पास ही एक बारटेंडर बीयर मग को साफ कर टेबल पर रख रहा है। अक्षय सिडनी की एक डिजिटल मार्केटिंग फर्म में कैंपेन मैनेजर हैं। उनके जैसे प्रोफेशनल्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जो पारंपरिक वर्कप्लेस से काम करने की जगह पब और रेस्टोरेंट्स जैसे फैशनेबल और सस्ते विकल्प चुन रहे हैं।
अब पारंपरिक वर्कप्लेस पर काम करने की जगह पब और रेस्टोरेंट्स जैसे फैशनेबल और सस्ते विकल्प भारत में भी यूरोप की जगह बढ़ते जा रहे हैं। कई प्रोफेशनल्स इस प्रकार अपनी कम्पनी बनाकर अपना काम कर रहे हैं।

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अक्षय इसके लिए 299 रुपये प्रतिदिन में स्टार्टअप माॅय एचक्यू से सब्सक्रिप्शन लेते हैं, जिसने शहर में मौजूद तमाम बार और कैफे से साथ समझौता कर उन्हें को-वर्किंग प्लेस में बदल दिया है। अक्षय को 299 रुपये में शहर के 80 रेस्टोरेंट्स, कैफे और पब से काम करने का विकल्प मिलता है। वह इसमें से 200 रुपये फूड और बेवरेज के लिए रिडीम भी कर सकते हैं। दिल्ली की एक और स्टार्टअप माॅय इंस्टास्पेस भी ऐसी ही सर्विस देती है। उसके करीब 20 रेस्टोरेंट्स, कैफे और पब से संपर्क हैं।

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स्टार्टअप और स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज के साथ काम कर रहे युवा टैलेंट की मांग तेजी से बढ़ रही है। पिछले साल प्रोफेशनल सर्विसेज फर्म, जेएलएल इंडिया की आई एक रिपोर्ट के मुताबिक 2020 तक करीब 1.3 करोड़ लोगों के को वर्किंग जगहों से काम करने का अनुमान है। रियल एस्टेस सर्विस फर्म नाइट फ्रैंक ने भी एक अनुमान में 2021 तक देश में को वर्किंग जगहों से काम करने वाले प्रोफेशनल्स की संख्या में तीन गुना बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है।

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माॅय एचक्यू के को फाउंडर विनायक अग्रवाल ने कहा कि रेस्टोरेंट्स इस कॉन्सेप्ट को पसंद कर रहे हैं क्योंकि इससे उन्हें खाली जगह से पैसा कमाने का मौका मिल रहा है। साउथ दिल्ली के एसडीए मार्केट स्थित कहवा कैफे की ओनर शिखा पाहवा ने बताया कि जिस समय रेस्टोरेंट्स में सबसे कम कस्टमर्स आते थे, अब उस समय में कस्टमर्स की संख्या में 20 पर्सेंट की बढ़ोतरी देखी गई है। उन्होंने कहा, आमदनी में ज्यादा इजाफा नहीं हुआ है, लेकिन कुछ नहीं से कुछ बिजनेस आना ज्यादा अच्छी बात है।

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कनॉट प्लेस में स्थित पेबल स्ट्रीट रेस्टोरेंट की आमदनी में भी बढ़ोतरी हुई है। रेस्टोरेंट के जनरल मैनेजर ने बताया, को-वर्किंग से हर महीने 20 से 25 हजार रुपये आमदनी बढ़ी है। इससे रेस्टोरेंट्स में हमेशा कुछ सीटें भरी रहती हैं, जो अलग ही अहसास देता है। अक्षय ने बताया कि इन जगहों से काम करने पीछे यहां के अच्छे माहौल और ’कूल फैक्टर’ को वजह बताया, वहीं दूसरों ने इन जगहों पर काम के लिए प्रिंटर्स जैसे जरूरी फैसिलिटी के मौजूद होने और फूड पर अच्छे ऑफर मिलने को वजह बताया।

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कंसल्टेंट्स पवन कुमार और विक्रम सिंह राठौड़ ने बताया कि उनका ऑफिस द्वारका में है, लेकिन इसकी जगह उन्होंने अब सेंट्रल दिल्ली के एक पब से काम करना शुरू कर दिया है। इससे उन्हें रोजाना दो घंटे कम ट्रैवल करना पड़ता है। 38 वर्षीय कुमार ने बताया, इसकी इकलौती खामी यह है कि हमें सभी को अपने काम को हर रोज 6.30 बजे शाम से पहले खत्म करना होता है क्योंकि इसके बाद उनका पीक समय शुरू हो जाता है।

चीयर्स डेस्क

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