शराब से धन कमाने में लखनऊ मंडल टाॅप पर, नंबर दो मेरठ

यूपी में सबसे अधिक शराब की खपत लखनऊ मंडल में होती है। दूसरे नंबर पर मेरठ मंडल है और तीसरे नंबर पर वाराणसी, चैथे नंबर पर कानपुर, पांचवे नंबर पर गोरखपुर मंडल है। यूपी के आबकारी विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो पूरे यूपी में वर्ष 2019-20 के लिए शराब का जो उपभोग लक्ष्य निर्धारित किया गया है उसमें लखनऊ नंबर वन पर है जिसका चालू वित्तीय वर्ष में 4484.02 करोड़ रुपए राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया गया है, और मई माह में 434.82 करोड़ रुपए राजस्व की कमाई भी हो चुकी है।

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गौरतलब है चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए यूपी सरकार ने राज्य में शराब की बिक्री से 33000 करोड़ का राजस्व उगाहने का लक्ष्य निर्धारित किया है और मई तक 3200 करोड़ रुपए का राजस्व हासिल किया जा चुका है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए आबकारी विभाग ने हर मंडल का अलग लक्ष्य निर्धारित किया हुआ है। इस हिसाब से शराब से धन कमा कर सरकार को देने में लखनऊ के बाद दूसरा नंबर मेरठ का आता है जिसका इस वर्ष का लक्ष्य 4233.98 करोड़ का है जिसमें मई तक 410.57 करोड़ रुपए कमाए जा चुके हैं। तीसरा नंबर कानपुर का है जहां का लक्ष्य 2956.37 करोड़ में से मई तक 286.68 करोड़ की कमाई की जा चुकी है। चैथा नंबर वाराणसी का है जिसका लक्ष्य 2532 करोड़ 97 लाख रुपए है जिसमें से मई तक 245 करोड़ 62 लाख रुपए की कमाई की जा चुकी है। इसके बाद आगरा 2536.72 करोड़ में से 245.99 करोड़ की कमाई की जा चुकी है।

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इसी तरह यूपी के अन्य मंडल हैं जिनके वार्षिक लक्ष्य को पूरा करने के लिए दुकानदार शराब बेचने में कोई कोताही नहीं करते। शराब की दुकानों की साप्ताहिक बंदी भी नहीं होती। केवल चिन्हित सार्वजनिक अवकाशों पर ही शराब की दुकानें बंद रहती हैं।

चीयर्स डेस्क

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